By अभिनय आकाश | Nov 02, 2026
अमेरिकी मीडिया हस्ती और राजनीतिक टिप्पणीकार टकर कार्लसन ने दावा किया है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान के खिलाफ परमाणु हमला करने का दबाव डाल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वाशिंगटन कुछ ही दिनों के भीतर परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर कोई फैसला ले सकता है। कार्लसन ने एक विस्तृत पोस्ट में लिखा है कि ये हथियार पहाड़ की ग्रेनाइट चट्टानों को भेदकर उन भूमिगत सुरंगों तक पहुंच सकते हैं, जहां कथित तौर पर परमाणु सामग्री को समृद्ध (एनरिच) करने का काम चल रहा है। कार्लसन ने लिखा इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दबाव में ट्रंप प्रशासन कुछ ही दिनों में ईरान पर परमाणु हमला कर सकता है। उन्होंने आगे दावा किया कि नेतन्याहू इस तरह के अभियान के लिए जोर दे रहे हैं। उन्होंने एक अज्ञात सूत्र के हवाले से कहा बीबी (नेतन्याहू) इस बारे में ट्रंप को रोज फोन करते हैं। कार्लसन की पोस्ट में संभावित परमाणु हमले या नेतन्याहू द्वारा डाले जा रहे कथित दबाव के दावों के समर्थन में कोई ऐसा सबूत नहीं दिया गया, जिसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जा सके।
कार्लसन ने चेतावनी दी कि तनाव और बढ़ने से खाड़ी क्षेत्र और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों को हुए नुकसान और ऊर्जा तथा उर्वरक बाजारों में आई बाधाओं की ओर इशारा किया। उन्होंने दावा किया कि अक्टूबर में होर्मुज जलडमरूमध्य में, दुनिया भर में तेल ढोने वाले लगभग 850 सुपरटैंकरों में से 11 बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। संभावित परमाणु हमले के परिणामों पर, कार्लसन ने आरोप लगाया कि 'पिकएक्स माउंटेन' पर ज़मीनी विस्फोट से फारस की खाड़ी प्रदूषित हो सकती है और 10 करोड़ लोगों की जलापूर्ति प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अमेरिका द्वारा परमाणु हथियारों का इस्तेमाल अन्य देशों के लिए एक मिसाल बन सकता है। कार्लसन ने दावा किया कि रूस ने कम से कम दो सरकारों से कहा है कि अगर अमेरिका ईरान पर परमाणु हमला करता है, तो उसे यूक्रेन के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की छूट मिल जाएगी। उन्होंने उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया से जुड़े संभावित परमाणु तनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि अमेरिकी प्रशासन ने फरवरी से अपने परमाणु सिद्धांत में चुपचाप बदलाव किया है, ताकि तथाकथित युद्धक्षेत्र वाले परमाणु हथियारों"का इस्तेमाल करना आसान हो सके।
टकर कार्लसन के ये दावे ऐसे समय में आए हैं जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत दोबारा शुरू कराने के लिए कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं, हालांकि नए सैन्य हमलों की संभावना पर भी चर्चा हो रही है। एक्सियोस (Axios) की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शनिवार को फोन पर बात की। दोनों के बीच ईरान के साथ चल रही बातचीत की स्थिति और दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू करने की संभावना पर चर्चा हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू मंगलवार को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के तुरंत बाद नए हमलों का दबाव बना रहे थे, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप बातचीत को और मौका देना चाहते थे। एक इजरायली सूत्र ने इस बातचीत को कड़ा बताया, जबकि एक अमेरिकी सूत्र ने इसे सीधी और स्पष्ट बातचीत कहा। बाद में ट्रंप ने इसे बहुत अच्छी बातचीत बताया और पुष्टि की कि ईरान उन मुद्दों में शामिल था जिन पर बात हुई, हालांकि उन्होंने ज्यादा ब्योरा नहीं दिया। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत ठीक चल रही है और उन्हें कोई बहुत जल्दी नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह संकेत भी दिया कि अमेरिका को अभी ईरान के एक-दो परमाणु ठिकानों पर ध्यान देने की जरूरत है, जिसमें उन्होंने खास तौर पर पिकेक्स माउंटेन का जिक्र किया। ट्रंप ने कहा हम यह 10 मिनट में कर सकते हैं। हमारे पास इसकी पूरी योजना है। आप पिकेक्स माउंटेन को देख सकते हैं। हमें उससे निपटना होगा और हम इसे बहुत तेजी से कर सकते हैं। इसी बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पिछले हफ्ते ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेज़ाई को एक पत्र भेजा, जिसमें बातचीत दोबारा शुरू करने की संभावना पर बात की गई थी। कतरी मध्यस्थों ने भी रविवार को लगातार तीसरे दिन ईरानी अधिकारियों के साथ चर्चा की, ताकि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच सीधी बातचीत शुरू कराने के लिए सहमति बन सके। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है और आगे की प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि अमेरिका, तेहरान के सवालों के जवाब कैसे देता है। अराघची ने कहा हम इस दिशा में हर संभव कोशिश कर रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि दूसरा पक्ष इतनी समझदारी दिखाएगा कि अन्य रास्तों के बजाय कूटनीति को चुने। दूसरी तरफ, कार्लसन का दावा है कि ट्रंप इस समय वेंस और अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ की सलाह सुन रहे हैं, जिनका मानना है कि ईरान के साथ अब भी समझौता संभव है। कार्लसन ने अमेरिकी प्रशासन से परमाणु तनाव के खतरे की चेतावनी देते हुए कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपील की।