By अभिनय आकाश | Oct 23, 2026
उत्तर प्रदेश के 15 जिलों में समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव को निशाना बनाने वाले पोस्टर सामने आए हैं। इन जिलों में लखनऊ, बलिया, मऊ, गाजीपुर, आजमगढ़, वाराणसी, बस्ती, हरदोई और सीतापुर शामिल हैं। अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान की तस्वीरों वाले इन पोस्टरों पर लिखा है - क्या आप सपा पर भरोसा कर सकते हैं? सभी माफिया भाई-भाई हैं। 2013 की UPPCS भर्ती परीक्षा का जिक्र करते हुए, पोस्टरों में दावा किया गया है कि 86 चयनित उम्मीदवारों में से 56 एक विशेष जाति से थे। कुछ पोस्टरों में मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर अखिलेश यादव की आलोचना की गई है, जिसमें लिखा है - दंगे, इफ्तार और बिरयानी — यही है सपा शासन की असली कहानी। इसके अलावा, अखिलेश सरकार के दौरान कब्रिस्तानों की चारदीवारी बनाने के लिए 200 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। पोस्टर पर लिखा है - खैनी और बनारसी पान- बजट तो कब्रिस्तान में चला गया।
अखिलेश यादव के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले में 'A' का मतलब 'अल्पसंख्यक' (minorities) है। मुस्लिम मतदाता और यादव समुदाय, पारंपरिक रूप से समाजवादी पार्टी का मुख्य वोट बैंक रहे हैं। इनके समर्थन के बिना सत्ता में वापसी करना मुश्किल होगा। हाल के दिनों में आजम खान के खेमे में इस बात को लेकर नाराजगी थी कि समाजवादी पार्टी इस वरिष्ठ नेता के साथ मजबूती से खड़ी नहीं है। आजम खान समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और पार्टी में सबसे प्रमुख मुस्लिम चेहरा बने हुए हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 20 जिलों की 100 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 22 प्रतिशत है। रुहेलखंड क्षेत्र में, मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी मुरादाबाद में 47.12 प्रतिशत, रामपुर में 50.57 प्रतिशत, संभल में 45 प्रतिशत और अमरोहा में 38 प्रतिशत है। पश्चिमी यूपी और रुहेलखंड की कई विधानसभा सीटों पर खान का काफी प्रभाव है।