By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 07, 2026
छत्रपति संभाजीनगर, सात अगस्त कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संयोजक अभिजीत दीपके ने शुक्रवार को भाजपा से आग्रह किया कि वह अपने गॉडफादर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत की उस सलाह पर अमल करे जिसमें उन्होंने कहा था कि विरोध-प्रदर्शन कर रहे ‘जेन-जी’ के युवाओं को राष्ट्रविरोधी नहीं कहा जाना चाहिए। दीपके ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके वैचारिक मार्गदर्शक आरएसएस के बीच तालमेल की कमी का भी दावा किया। मुंबई में भागवत द्वारा ‘जेन-जी’ के साथ संवाद के एक दिन बाद पत्रकारों से बातचीत में दीपके ने कहा कि सत्तारूढ़ दल को आरएसएस प्रमुख की उस बात को स्वीकार करना चाहिए कि नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुआ युवाओं का आंदोलन उनकी जायज शिकायतों को लेकर था।
उन्होंने कहा, ‘‘पहले भाजपा अध्यक्ष ने हमें ‘वायरस’ कहा था और पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हमें आतंकवादियों की ‘बी-टीम’ बताया था। अब उन्हें मोहन भागवत की बात सुननी चाहिए, क्योंकि वे भाजपा के मार्गदर्शक और ‘गॉडफादर’ हैं।’’ कॉजपा नेता ने दावा किया कि आरएसएस प्रमुख की बात की अनदेखी किया जाना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि भाजपा के रुख और भागवत के विचारों के बीच बिल्कुल भी तालमेल नहीं है, क्योंकि सत्तारूढ़ दल अब भी इसके विपरीत रुख अपनाए हुए है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर वे अपने ही मार्गदर्शक की बात नहीं सुन रहे हैं, तो यह चिंता की बात है। यदि ऐसा है, तो भागवत को एक बार भाजपा से बात करनी चाहिए।’’ जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़े सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो का उल्लेख करते हुए दीपके ने उनकी गहन जांच कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘मेरा मानना है कि सोशल मीडिया पर जो वीडियो प्रसारित हो रहे हैं, उनकी जांच होनी चाहिए।
यदि जांच हुई तो (भाजपा) आईटी प्रकोष्ठ से जारी फर्जी वीडियो का पर्दाफाश हो जाएगा।’’ दीपके ने यह भी बताया कि कॉजपा ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के समर्थन में अपने दल भेजे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन आंदोलनों की अनदेखी की गई तो अलग-अलग स्थानों पर चल रहे ये विरोध प्रदर्शन जल्द ही देशव्यापी बड़े आंदोलन का रूप ले सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम युवाओं से जुड़े मुद्दों पर लोगों को एकजुट करने का प्रयास करेंगे।
यदि लोग राजनीतिक और वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर साथ आते हैं, तो वे सरकार पर उसी तरह दबाव बना सकते हैं, जैसा हमने जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान देखा था।