Abhishek Sharma फ्लॉप, टॉप ऑर्डर फेल! T20 World Cup में South Africa से हार के बाद बढ़ी Team India की मुश्किलें

By Ankit Jaiswal | Feb 23, 2026

रविवार रात जो हुआ उसने कई पुराने सवाल फिर से खड़े कर दिए हैं। लगातार 12 टी20 विश्व कप मैच जीतने के बाद भारत की लय साउथ अफ्रीका ने जिस अंदाज में तोड़ी, उसने टीम के भीतर और बाहर दोनों जगह बेचैनी बढ़ा दी है।

गौरतलब है कि टूर्नामेंट से पहले भारत को प्रबल दावेदार माना जा रहा था। पिछले 20 महीनों में टीम ने आक्रामक और संतुलित क्रिकेट खेलते हुए लगातार सफलता हासिल की थी। लेकिन साउथ अफ्रीका के खिलाफ मुकाबले में वही टीम बिखरी हुई नजर आई।

सबसे बड़ी चिंता शीर्ष क्रम की है। अभिषेक शर्मा लगातार तीसरी बार शून्य पर आउट हुए। आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष टी20 बल्लेबाज माने जाने वाले अभिषेक के लिए यह दौर आत्मविश्वास पर भारी पड़ता दिख रहा है। रविवार को उन्होंने पहली गेंद पर चौका जरूर लगाया, लेकिन जल्द ही नियंत्रण खो बैठे। मौजूद जानकारी के अनुसार पांच मैचों में चार बार पहले ओवर में विकेट गिर चुका है, जो टीम की शुरुआत पर बड़ा असर डाल रहा है।

ओपनिंग संयोजन भी सवालों के घेरे में है। अभिषेक और इशान किशन दोनों बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और नंबर तीन पर भी बाएं हाथ के तिलक वर्मा का होना विपक्षी टीमों को रणनीतिक बढ़त दे रहा है। साउथ अफ्रीका के कप्तान एडेन मार्करम ने ऑफ स्पिन से फिर शुरुआती झटका दिलाया। लगातार तीसरे मैच में पहले ओवर में ऑफ स्पिनर को विकेट मिला, जो सोचने वाली बात है।

तिलक वर्मा की स्थिति भी आसान नहीं रही। तिलक वर्मा टूर्नामेंट से ठीक पहले चोट और सर्जरी से उबरे थे। लंबे ब्रेक के बाद सीधे बड़े मंच पर उतरना आसान नहीं होता। उन्होंने शुरुआत में 25 और 30 के आसपास की पारियां खेलीं, लेकिन साउथ अफ्रीका के खिलाफ दूसरी ही गेंद पर बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में आउट हो गए। विशेषज्ञों का मानना है कि नंबर तीन पर लगातार शुरुआती विकेट गिरने का दबाव उन पर साफ दिख रहा है।

टीम संयोजन को लेकर भी चर्चा तेज है। अक्षर पटेल को बाहर रखकर वॉशिंगटन सुंदर को मौका दिया गया। तर्क यह था कि पावरप्ले में ऑफ स्पिन से साउथ अफ्रीका के बाएं हाथ के बल्लेबाजों को रोका जाए। लेकिन जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह की शानदार गेंदबाजी के चलते वह योजना लागू ही नहीं हो पाई। बाद में डेवॉल्ड ब्रेविस और डेविड मिलर ने स्पिनरों पर दबाव बना दिया। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अक्षर जैसा अनुभवी ऑलराउंडर बेहतर विकल्प साबित हो सकता था।

अब नजरें आगे के मुकाबलों पर टिक गई हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ चेन्नई में होने वाला मैच निर्णायक माना जा रहा है। चर्चा यह भी है कि संतुलन बनाने के लिए संजू सैमसन को शामिल किया जा सकता है, ताकि दाएं हाथ का विकल्प मिले। 

टीम प्रबंधन के लिए यह समय त्वरित फैसलों का है। कोच गौतम गंभीर पहले ही दबाव में हैं। बता दें कि घरेलू टूर्नामेंट में हार का असर अपेक्षाकृत ज्यादा महसूस किया जाता है। ऐसे में खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मजबूत रखना और संयोजन में स्पष्टता लाना बेहद जरूरी है।

फिलहाल गणित सरल है। भारत को अपने अगले दोनों मुकाबले हर हाल में जीतने होंगे और उम्मीद करनी होगी कि साउथ अफ्रीका अपने बाकी मैच भी जीतकर समीकरण आसान कर दे। रन रेट की जटिल गणना में उलझने के बजाय टीम को अपने खेल पर लौटना होगा। समय कम है, चुनौतियां बड़ी हैं, लेकिन मौका अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है

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