By संतोष उत्सुक | Feb 21, 2026
प्रशासन हरकत में आ गया है । प्रशासन हरकत में आ जाए और कुछ ठोस न हो, ऐसा नहीं हो सकता। प्रशासन सचमुच हरकत में आ जाए तो बड़े बड़े हलकट भी हिल जाया करते हैं। हवा और पानी की बातें जब ठोस रूप लेने लगें तो नींद भी खुद ब खुद खुलने लगती है। प्रशासन एक बार हरकत में आ जाए, तो सबसे पहले लोकतान्त्रिक परम्परा के अनुसार, कड़क नियमों की परिधि में, अनुशासित नियम और शर्तों के विशेषज्ञों की कमेटी का गठन कर देता है। अच्छी तरह से गठित कमेटी बहुत ज़्यादा सख्ती से घटनाओं का निरीक्षण करती है। प्रकाशित रिपोर्टों में छपे तथ्यों को चश्मा लगाकर गंभीरता से बार बार देखती है। अब उजागर की गई, पहले भुला दी गई समस्याओं को विस्तार से पढ़ती है। प्रशासन के हरकत में आने की सभी प्रशंसा करते हैं सिवाए प्रशासन के ।
स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए, सभी के लिए भरपूर नींद लेना ज़रूरी बताया गया है। प्रशासन आम तौर पर इस नियम को ईमानदारी से फॉलो करता रहता है। प्रशासन के चारित्रिक गुण जैसे आम तौर पर उदास, निष्क्रिय रहना, सर्दी के मौसम में आंख मीच कर धूप सेंकना, इसमें काफी हाथ बंटाते हैं। प्रशासन को जगाने में बरसात जैसी कुदरती आपदा बेहद सक्रिय भूमिका अदा कर सकती है। निडर पत्रकारों के कारण भी कभी कभार ऐसा होता है, जो आंखे खोलकर सार्वजनिक मुद्दों के पीछे पड़े रहते हैं और तब तक प्रशासन को जगाए रखते हैं जब तक प्रशासन द्वारा हरकत में आकर उच्च स्तरीय कमेटी गठन की घोषणा नहीं होती। वह बात अलग है कि नई बनी कमेटी कब और कितना सोती है।
प्रशासन को शिकायत बिलकुल पसंद नहीं होती । जो लोग बार बार शिकायत करते हैं, ज्ञापन देते हैं, सोशल मीडिया को शिकायत मंच बनाते हैं उन्हें प्रशासन पसंद नहीं करता। शिकायत से पहले तो कार्रवाई का सवाल पैदा नहीं होता । शिकायत के बाद प्रशासन नए अंदाज़ में पसर जाया करता है। आम लोग नहीं जानते कि शिकायत का निबटारा करना प्रशासन को बखूबी आता है। प्रशासन और उसके किसी भी विभाग द्वारा की गई, जांच में जारी की गई क्लीन चिट को, कोई नादान मैला करने की कोशिश करे या पुन जांच की मांग करे तो भी प्रशासन को अच्छा नहीं लगता । इस तरह उसका, वास्तव में हरकत में आना असंभव सा हो जाता है और परेशानी आम लोगों को ही होती है।
हरकत में आया प्रशासन ज़िम्मेदारी भरा बयान जारी करता है कि तथ्यों की पुष्टि की जाएगी, हर हालत में, समस्या की जड़ तक पहुंचा जाएगा। सार्वजनिक मसलों का हल ढूंढना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल कर लिया गया है। प्रशासन जब हरकत में आ जाता है तो दिल करता है, प्रशासन की जगह प्रशासनजी कहना शुरू कर दूं । अब प्रशासनजी हरकत में आ गए हैं तो लगता है कुछ ठोस होने वाला है।
- संतोष उत्सुक