By Ankit Jaiswal | Feb 12, 2026
इन दिनों जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियां नई तकनीकों को मुनाफे वाले मॉडल में बदलने की होड़ में हैं, उसी बीच ओपनएआई की एक पूर्व शोधकर्ता ने एक अहम चेतावनी दी है। बता दें कि हाल ही में ओपनएआई से अलग हुईं जोई हिटज़िग ने चैटजीपीटी में विज्ञापन शामिल करने के विचार पर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह चैटबॉट अब लोगों की जिंदगी से जुड़ी बेहद निजी जानकारी का एक अनोखा संग्रह बन चुका है।
हिटज़िग की चिंता सिर्फ बैनर ऐड या स्पॉन्सर्ड जवाबों तक सीमित नहीं है। उनका फोकस इस बात पर है कि बीते कुछ वर्षों में यूजर्स ने चैटजीपीटी के साथ किस तरह की बातें साझा की हैं। सोशल मीडिया पोस्ट के उलट, एआई से बातचीत अक्सर निजी, सीधी और बिना किसी दिखावे के होती है। लोग इसे एक तटस्थ और सुरक्षित माध्यम मानकर अपने स्वास्थ्य, रिश्तों, आस्था, पहचान और निजी उलझनों पर खुलकर सवाल करते रहे हैं।
गौरतलब है कि जोई हिटज़िग ने लिखा कि चैटजीपीटी यूजर्स ने इंसानी ईमानदारी और खुलापन ऐसा साझा किया है, जिसकी मिसाल पहले नहीं मिलती। लोगों को लगता रहा कि वे ऐसे सिस्टम से बात कर रहे हैं जिसका कोई छिपा एजेंडा नहीं है। ऐसे में अगर इसी निजी डेटा के आधार पर विज्ञापन बनाए जाते हैं, तो यह यूजर्स को प्रभावित या नियंत्रित करने की नई संभावनाएं पैदा कर सकता है, जिनसे निपटने के लिए फिलहाल पर्याप्त साधन मौजूद नहीं हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार ओपनएआई पहले ही संकेत दे चुका है कि वह चैटजीपीटी में विज्ञापन का परीक्षण कर सकता है। कंपनी का कहना रहा है कि वह यूजर्स की बातचीत विज्ञापनदाताओं के साथ साझा नहीं करेगी और न ही डेटा बेचेगी। हालांकि, हिटज़िग का तर्क है कि समस्या आज की नहीं, बल्कि भविष्य की है। उनके मुताबिक जैसे ही विज्ञापन कमाई का हिस्सा बनते हैं, वैसे ही संस्थागत प्राथमिकताएं धीरे-धीरे बदल सकती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भले ही मौजूदा प्रबंधन साफ सीमाएं तय करने की मंशा रखता हो, लेकिन व्यावसायिक दबाव समय के साथ उन नियमों को कमजोर कर सकता है। इस संदर्भ में उन्होंने स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था या कानूनी ढांचे की जरूरत पर जोर दिया, ताकि यूजर डेटा को मुनाफे से ऊपर सार्वजनिक हित के तहत सुरक्षित रखा जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बहस सिर्फ ओपनएआई तक सीमित नहीं है। कई सर्वे बताते हैं कि बड़ी संख्या में यूजर्स विज्ञापन आने के बावजूद मुफ्त एआई टूल्स का इस्तेमाल जारी रखेंगे। यह एक तरह की ‘प्राइवेसी थकान’ को दिखाता है, जहां असहजता के बावजूद लोग सुविधा छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
कुल मिलाकर, चैटजीपीटी अब सिर्फ एक तकनीकी टूल नहीं रहा। यह शिक्षक, सहायक, सलाहकार और विचार-मंथन का साथी बनता जा रहा है। ऐसे में इस प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन की एंट्री सिर्फ कारोबारी फैसला नहीं, बल्कि भरोसे और प्रभाव से जुड़ा बड़ा सवाल बनकर सामने आई है।