By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Sep 01, 2021
नयी दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त कार्यालय (यूएनएचसीआर) के बाहर शरणार्थी दर्जे की मांग को लेकर प्रदर्शन के लिए बड़ी संख्या में अफगान नागरिकों के एकत्रित होने पर बुधवार को चिंता जताई और कहा कि यह कोरोना वायरस के तेजी से फैलने का कारण बन सकता है क्योंकि वहां पर कोविड-19 नियमों का पालन नहीं किया जा रहा। उच्च न्यायालय ने कहा कि इस स्थिति को जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि वहां पर प्रदर्शनकारी बिना मास्क पहने एक-दूसरे के निकट दिख रहे हैं। अदालत ने अधिकारियों से इस पर कार्रवाई करने को कहा। न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने केंद्र, दिल्ली सरकार और पुलिस से कहा कि इस मुद्दे के समाधान के लिए वे मिलकर सोच विचार करें और यह भी ध्यान रखें कि लोगों की भीड़ कोविड-19 फैलने का कारक न बने।
एसोसिएशन की ओर से पेश अधिवक्ता ऋषिकेश बरूआ ने कहा कि लोगों को आने-जाने में दिक्कत हो रही है, यही नहीं जिस तरह से वे विदेशी नागरिक प्रदर्शन में एक दूसरे के करीब बैठते हैं इससे कोविड-19 फैलने का खतरा है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने और रास्ता साफ करवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि लोग वहां रहने लगे हैं, थूकते हैं, खुले में शौच करते हैं और उन्होंने इलाके में अतिक्रमण कर लिया है और संभवत: इन लोगों का कोविड-19 रोधी टीकाकरण भी नहीं हुआ है। केंद्र के स्थायी वकील अजय दिग्पाल ने कहा कि यह सामान्य हालात नहीं हैं और निवासियों को थोड़ा मानवीय रूख अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये अंतरराष्ट्रीय मुद्दे हैं जिनका समाधान रातोंरात नहीं निकाला जा सकता क्योंकि इसके बड़े अंतरराष्ट्रीय दुष्परिणाम होंगे। अदालत ने अधिकारियों से कहा कि इस मुद्दे का समाधान किस तरह निकाला जा सकता है इस बारे में वे निर्देश प्राप्त करें। इसके साथ ही उसने मामले पर सुनवाई की अगली तारीख तीन सितंबर तय की। अदालत ने कहा, ‘‘लोगों को परेशानी हो रही है, चिंता की केवल यही बात नहीं है बल्कि हमें इस बात की चिंता अधिक है कि यह कोविड-19 फैलने का कारक न बन जाए। शहर दूसरी लहर से बमुश्किल उबरा है। आपको सुनिश्चित करना होगा कि प्रदर्शनकारी कोविड नियमों का पालन करें। पहले उनसे मास्क पहनने और फिर प्रदर्शन करने को कहें।