By निधि अविनाश | Jul 08, 2021
अप्रैल के मध्य में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा अफगानिस्तान के हमेशा के लिए युद्ध की समाप्ति की घोषणा के बाद अब तालिबान ने अफगानिस्तान में अफगान बलों से अधिक क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है। आपको बता दें कि तालिबान अब अफगानिस्तान के सभी 421 जिलों में से एक तिहाई को नियंत्रित कर रहा है। इसी बीच अफगानिस्तान के लोग अब तालिबान के क्रूर शासन के बीच घिरे जा रहे हैं। सख्त इस्लामी कानून और सिर काटने और यातना जैसे दंड तालिबानियों के क्रू शासन में शामिल है। इस डर से बचने के लिए अब कई लोग अपना सामान लेकर कहीं और पलायन करने के लिए भाग रहे है। न केवल आम नागरिक बल्कि ज्यादातर अधिकारी और सासंद भी इलाकों से भाग रहे है।
तालिबान में दिखा महिलाओं का हौसला!
एक रिपोर्ट के अनुसार, क्रूर शासन का विरोध करने के लिए तालिबान की सड़कों पर सैकड़ों महिलाओं ने बंदूकें लहराईं और जिहादी विरोधी नारे लगाए है। महिला निदेशालय की प्रमुख और मार्च करने वालों में से एक हलीमा परस्तिश ने एक मीडिया को बताया कि कई महिलाएं ऐसी है जो सुरक्षा बलों को केवल प्रतीकात्मक रूप से प्रेरित कर रही हैं तो वहीं कई महिलाएं युद्ध के मैदान में जाने के लिए बिल्कुल तैयार है। बता दें कि तालिबान बलों ने हाल ही में महिलाओं को अकेले घर से बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही नए दहजे नियम लागू कर दिया है। वहीं जहां आतंकवादी समूह ने अपना नियत्रंण बना लिया है वहां महिलाओं को बुर्का पहनने के लिए कहां जा रहा है।
एक मीडिया से बात करते हुए 20 साल की उम्र की एक महिला ने बताया कि, कोई भी महिला लड़ना नहीं चाहती है, वह केवल अपनी शिक्षा और हिंसा से दूर रहने के लिए विरोध पर उतरे है। ऐसी परिस्थितियों में ही केवल इम महिलाओं को अपनी आवाज उठानी पड़ रही है। इसके साथ ही कई महिलाओं ने कहा कि, हम नहीं चाहते है कि देश उन लोगों के नियंत्रण में हो जो महिलाओं के साथ वैसा ही व्यवहार करते हैं जैसा वे करते हैं। हमने यह दिखाने के लिए बंदूकें उठाईं कि अगर हमें लड़ना है, तो हम लड़ेंगे।
2001 से तालिबान बलों का शासन!
साल 2001 में अमेरिका में 9/11 हमलों के बाद तालिबान बलों ने पहले अफगानों पर इस्लामी शासन का एक कठोर कदम उठाया था। बता दें कि लड़कियों को स्कूल जाने से रोक दिया गया था और महिलाओं को घर से बाहर काम करने या किसी पुरुष रिश्तेदार के साथ सार्वजनिक रूप से देखे जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। नियम तोड़ने पर कोड़े, सिर काटने, फाँसी और सूली पर चढ़ाने जैसी सजा दी जाती थी।