India के Service Export की बड़ी छलांग, Commerce Ministry के आंकड़ों में हिस्सेदारी 48% के पार

By Ankit Jaiswal | Jun 17, 2026

देश की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की बढ़ती ताकत अब निर्यात के आंकड़ों में भी साफ दिखाई देने लगी है। सूचना प्रौद्योगिकी, परामर्श सेवाओं और डिजिटल माध्यम से दी जाने वाली सेवाओं की बढ़ती वैश्विक मांग ने भारत को इस क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। यही वजह है कि पिछले एक दशक में सेवा निर्यात का योगदान लगातार बढ़ा है और अब यह देश के कुल निर्यात का लगभग आधा हिस्सा बन चुका है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, वर्ष 2014-15 में भारत का सेवा निर्यात 158.1 अरब डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर 421.3 अरब डॉलर हो गया है। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है और भारत इस क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।

गौरतलब है कि पिछले 12 वर्षों में सेवा निर्यात ने लगातार मजबूती दिखाई है। केवल वर्ष 2020-21 में कोविड महामारी के कारण इसमें अस्थायी गिरावट देखने को मिली थी। महामारी के बाद दुनिया भर में डिजिटल सेवाओं की मांग बढ़ी और इसका सबसे बड़ा लाभ भारत को मिला है।

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं अभी भी भारत के सेवा निर्यात की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई हैं। कुल सेवा निर्यात में इनकी हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक है। इसके अलावा पेशेवर और प्रबंधन परामर्श सेवाएं भी तेजी से उभरकर दूसरे सबसे बड़े योगदानकर्ता के रूप में सामने आई हैं।

बता दें कि वैश्विक क्षमता केंद्रों, जिन्हें सामान्य रूप से बहुराष्ट्रीय कंपनियों के संचालन और तकनीकी सहायता केंद्र के रूप में जाना जाता है, ने भी सेवा निर्यात को नई गति दी है। बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारत में अपने संचालन केंद्र स्थापित कर रही हैं, जिससे रोजगार के साथ-साथ विदेशी आय में भी वृद्धि हो रही है।

वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में सेवा निर्यात की औसत वार्षिक वृद्धि दर 9.3 प्रतिशत रही है। यह दर कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर मानी जा रही है।

केवल सेवा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि वस्तु निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2014-15 में भारत का वस्तु निर्यात 310 अरब डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर 442 अरब डॉलर पहुंच गया है। इससे स्पष्ट है कि देश के उत्पादन और व्यापार दोनों क्षेत्रों में विस्तार हुआ है।

मौजूद आंकड़ों के अनुसार, वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर भारत का कुल निर्यात 2014-15 के 468 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 863 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह वृद्धि भारत की वैश्विक व्यापारिक स्थिति को मजबूत करने वाली मानी जा रही है।

वाणिज्य मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यापार को आसान बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इनमें 47 प्रक्रियाओं को सरल बनाना, विदेशी व्यापार नीति से जुड़ी प्रक्रियाओं का स्वचालन, आयातक-निर्यातक कोड की स्वतः स्वीकृति व्यवस्था और निर्यात प्रोत्साहन अभियान की शुरुआत शामिल है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डिजिटल सेवाओं, सूचना प्रौद्योगिकी और वैश्विक क्षमता केंद्रों का विस्तार इसी गति से जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत का सेवा क्षेत्र निर्यात का और भी बड़ा आधार बन सकता है। वर्तमान आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि भारतीय सेवा क्षेत्र वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका लगातार मजबूत करता जा रहा है।

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