By प्रभासाक्षी ब्यूरो, लखनऊ | Aug 13, 2021
लखनऊ। प्रभु श्रीराम अपनी जन्मस्थली अयोध्या में कल बाल स्वरूप अवतार में करीब पांच सदी के बाद चांदी के झूला पर विराजमान हो गए। राम जन्मभूमि परिसर में लम्बे समय से अस्थाई गर्भ ग्रह में विराजमान रामलला को गत दिवस नवनिर्मित रजत हिंडोले पर आसीन कराया गया। रामलला रक्षाबंधन तक इसी चांदी के हिंडोले पर विराजमान रहेंगे और उन्हें झूला झुलाया जाएगा। श्रीराम तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या में रामलला के लिए चांदी का झूला तैयार कराया था।
सनातन उपासना परंपरा और शास्त्रों के मर्मज्ञ जगद्गुरु रामानुजाचार्य डॉ. राघवाचार्य के अनुसार यह रामलला के गौरव की वापसी ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतीयता के गौरव की प्रतिष्ठा का क्षण है, वह इसलिए कि आराध्य की प्रतिष्ठा के साथ समाज और देश की प्रतिष्ठा सुनिश्चित होती है। अयोध्या में करीब 493 वर्ष पहले भव्यता-दिव्यता का पर्याय राम मंदिर तोड़े जाने के बाद से ही रामलला की सेवा-पूजा उपेक्षित रही है। नौ नवंबर 2019 को सुप्रीम फैसला आने के साथ रामलला को टेंट के अस्थाई मंदिर से बाहर करने का प्रयास शुरू कर दिया गया। अब यहां न केवल भव्य मंदिर निर्माण की प्रक्रिया निरंतर आगे बढ़ रही है, बल्कि रामलला के दरबार में वह सारे उत्सव होने लगे हैं।