By अभिनय आकाश | Feb 16, 2026
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में कहा था कि इंडीजीनियस फाइटर जेट इंजन का उत्पादन अगले साल से भारत में शुरू होगा। यह बयान सामान्य नहीं था। यह संकेत था कि भारत अब जेट इंजन टेक्नोलॉजी के सबसे कठिन और विशिष्ट क्लब में प्रवेश करने जा रहा है। यूके की 240 के एन डील क्या है और एमका को इससे कितना बड़ा बूस्ट मिलेगा और कावेर इंजन प्रोग्राम का भविष्य क्या होगा। दरअसल फाइटर जेट बनाना कठिन है लेकिन जेट इंजन बनाना उससे भी ज्यादा कठिन है। एक आधुनिक टर्बो फैन इंजन में लगभग 3000 से अधिक प्रसीजन कॉम्पोनेंट होते हैं। इनमें से कई पार्ट्स 1500 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा तापमान पर काम करते हैं।
सुपर एलॉय मटेरियल सिंगल क्रिस्टल ब्लेड टेक्नोलॉजी, एडवांस कूलिंग सिस्टम यह सब मिलाकर जेट इंजन बनता है। दुनिया में बहुत कम देश हैं जो यह क्षमता रखते हैं। अमेरिका, रूस, फ्रांस, यूके और चीन। अब भारत इस सूची में शामिल होने की तैयारी कर रहा है। दरअसल हाल ही में Royals Ryce के सीईओ ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की जिसकी तस्वीर सामने आई लेकिन इस बीच ऑफर दिया गया है भारत को। ऑफर क्या है यह जान लीजिए। ऑफर है कि भारत में जेट इंजन का निर्माण किया जाएगा। पूर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ बौद्धिक संपदा यानी कि आईपी में भारत की भागीदारी होगी।
एमका के लिए 120 केn से शुरुआत की जाएगी और भविष्य में 240 केn तक थ्रस्ट बढ़ाने की योजना का ऑफर है। यह सामान्य लाइसेंस प्रोडक्शन नहीं है। यह को डेवलपमेंट मॉडल है जिसमें भारतीय इंजीनियर सीधे डिजाइन और विकास में शामिल होंगे। अब भारत का पांचवी पीढ़ी का फाइटर जेट प्रोग्राम एमका यानी कि एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट भविष्य की वायु शक्ति का आधार है। एमका को सुपर क्रूज स्टेल्थ हाई पेलोड और लॉन्ग रेंज जैसी क्षमताएं चाहिए। इसके लिए हाई थिस्ट इंजन जरूरी है। अगर 240 के तक की क्षमता हासिल होती है तो एमका ना केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन जाएगा। अब भारत पहले ही जनरल इलेक्ट्रिक के साथ F414 इंजन को लेकर समझौते कर चुका है।