मोदी के बाद पुतिन-जिनपिंग को ट्रंप की धमकी, कहा- सिर्फ अमेरिका से ही डरते हैं ये लोग

By अभिनय आकाश | Jan 08, 2026

अमेरिका, डोनाल्ड ट्रंपग्रीनलैंडवेनेजुला, रूस, चीन, भारत, कनाडा और नाटो यह सब अलग-थलग घटनाएं नहीं रही हैं। बल्कि एक ही बड़े वैश्विक टकराव की कई कड़ियां बन चुकी है। ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के बयान अब सिर्फ बयान नहीं रह गए। कनाडा ने इसे सीधी चेतावनी के रूप में लिया है। कनाडा की विदेश मंत्री ग्रीनलैंड जाने वाली हैं। ग्रीनलैंड में कनाडा दूतावास खोलने जा रहा है। यूरोपीय देश भी खुलकर ट्रंप के खिलाफ खड़े नजर आ रहे हैं। कनाडा को यह एहसास हो चुका है कि आज ग्रीनलैंड कल कनाडा ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि कनाडा को अमेरिका का हिस्सा बन जाना चाहिए। यानी अब मामला मजाक या फिर बयानबाजी का नहीं रह गया। दुनिया पहले ट्रंप को हल्के में लेती थी। लेकिन वेनेजुला की घटना ने सबको जगा दिया। माधुरों को हटाया। वेनेजुला का ऑयल कंट्रोल में लिया। ट्रंप ने खुले शब्दों में कहा कि आई रन द कंट्री। यहीं से दुनिया को समझ में आ गया कि ट्रंप के शब्द आने वाली कारवाई है।

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ट्रंप ने अगला कदम उठाया है रूस और चीन को वेनेजुला से बाहर निकालने की चेतावनी। कहा गया है कि वेनेजुला, रूस, चीन, क्यूबा से आर्थिक रिश्ते तोड़े, यूएस ऑयल को प्राथमिकता देने का दबाव है। यानी साफ संदेश है। या तो अमेरिका के साथ रहो या हमारे खिलाफ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दोहराया कि उन्होंने दुनिया भर में कई युद्धों को समाप्त किया है और अमेरिका के बिना नाटो का कोई महत्व नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि रूस और चीन को बिना अमेरिका के नाटो से कोई डर नहीं है। उन्होंने टूथ सोशल पर लिखा, भागीदारी के बिना रूस अब तक पूरे यूक्रेन पर कब्जा कर चुका होता। यह भी याद रखिए कि मैंने अकेले ही आठ युद्ध खत्म किए और नाटो का सदस्य होने के बावजूद नॉर्वे ने मुझे नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया।

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हालांकि अमेरिका के कदम के बाद चीन चुप बैठने वालों में से नहीं है। चीन वेनेजुला का सबसे बड़ा ऑयल खरीददार है। साल 2025 में रोज 6.13 लाख बैरल तेल चीन को मिलता है। चीन ने कहा कि हम अपने ऑयल टैंकरों की सुरक्षा करेंगे। यह सीधा संकेत है कि अगर जरूरत पड़ी तो चीन सैन्य मौजूदगी भी बढ़ा सकता है। अब ट्रंप ने भारत को भी कहा कि रूस से तेल मत खरीदो। हम सस्ता तेल देंगे। यानी ऑयल के जरिए भारत पर भी दबाव बनाने की कोशिश। अगर यूरोप, कनाडा, चीन, रूस और ग्लोबल साउथ और भारत सब एकजुट हुए तो ट्रंप को रोका जा सकता है। 

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