नेतन्याहू के बाद अब ट्रंप की बारी, चुनाव हारे तो क्या होगा? समझिए

By अभिनय आकाश | Nov 02, 2026

अमेरिका में मिड टर्म इलेक्शन होने जा रहे हैं और इस चुनाव पर सिर्फ अमेरिका ही नहीं भारत समेत पूरी दुनिया की नजरें हैं। इसकी वजह है कि इस चुनाव से तय होगा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अगले 2 साल तक संसद का साथ मिलेगा या फिर उनके सामने विपक्ष की ऐसी दीवार खड़ी हो जाएगी जिसे पार करना आसान नहीं होगा। ट्रंप ने अपनी रिपब्लिकन पार्टी को जिताने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। लेकिन मुकाबला दिलचस्प है। एक तरफ रिपब्लिकन पार्टी अपना बहुमत बचाने में जुटी है तो दूसरी तरफ डेमोक्रेटिक पार्टी संसद के दोनों सदनों में वापसी की कोशिश कर रही है। अब सवाल है कि आखिर अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव 4 साल में होता है। दरअसल अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 साल का होता है। लेकिन वहां संसद यानी कांग्रेस के चुनाव हर 2 साल में होते हैं। जब यह चुनाव राष्ट्रपति के 4 साल के कार्यकाल के बीच में होते हैं तो इन्हें मिड टर्म इलेक्शन कहा जाता है। अमेरिका की संसद के दो सदन हैं। पहला हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स दूसरा सीनेट। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स को आप भारत की लोकसभा की तरह समझ सकते हैं और सीनेट को राज्यसभा की तरह। लेकिन दोनों देशों के चुनावी सिस्टम में एक बड़ा अंतर है। 

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ऐसे में अगर डेमोक्रेटिक हाउस या सीनेट पर नियंत्रण आसानी से कर लेते हैं, तो वह ट्रंप के प्रस्तावों को रोक सकते हैं। सरकारी बजट पर सवाल उठा सकते हैं और उनकी पॉलिसीज को लेकर भी जांच शुरू कर सकते हैं। यहां तक कि ट्रंप प्रशासन के फैसलों की जांच के लिए संसदीय कमेटियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। भ्रष्टाचार के आरोप हो, वाइट हाउस में बाल रूम बनाने का विवाद हो या आईसी एजेंट्स की कारवाई विपक्ष इन मुद्दों पर ट्रंप प्रशासन से जवाब मांग सकता है। डेमोक्रेटिक पार्टी में ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की मांग को लेकर भी बहस होती रही है। हालांकि महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करना और राष्ट्रपति को पथ हटाना दो अलग-अलग संवैधानिक प्रक्रियाएं हैं। लेकिन अगर रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में अपना बहुमत बचा लेती है तो ट्रंप को अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में संसदीय स्तर पर ज्यादा सहयोग मिलेगा। अब बात करते हैं उन मुद्दों की जिन पर इस बार अमेरिकी जनता वोट करेगी। अमेरिका में क्या है चुनावी मुद्दे? पहला महंगाई और अर्थव्यवस्था। अमेरिका में आम लोगों के लिए रोजमर्रा की चीजों की कीमतें, घर का खर्च और रोजगार जैसे सवाल अहम बन गए हैं। दूसरा ट्रंप की टेरिफ पॉलिसी। ट्रंप दूसरे देशों से आने वाले सामान पर टेरिफ लगाने की नीति अपना रहे हैं।

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