अपनी गलतियाँ नहीं ढूंढ़ेगा विपक्ष, EVM पर दोष मढ़ देना है सबसे आसान

By नीरज कुमार दुबे | Jun 11, 2019

17वीं लोकसभा के पहले सत्र के दौरान विपक्ष अपनी ताकत प्रदर्शित करने की तैयारी कर रहा है और हालिया लोकसभा चुनावों में हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ने की तैयारी की जा रही है। हालांकि ईवीएम पर आरोप लगाने को लेकर विपक्ष में ही दोफाड़ है। राकांपा नेता शरद पवार हों या तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी हों या फिर बसपा प्रमुख मायावती हों, इन्होंने तो चुनाव परिणामों के बाद ईवीएम पर शंका जता ही दी है अब बारी अन्य नेताओं की भी आने वाली है। पटकथा लिखी जा चुकी है। दिल्ली में मीडिया के कैमरों के सामने एक बार फिर विपक्षी नेता एक दूसरे का हाथ थामे हुए 'संविधान और संवैधानिक संस्थानों को बचाने' की कसमें खाते नजर आएंगे।

इसे भी पढ़ें: तेलंगाना में कांग्रेस विधायक TRS में चले गये, हो सकता है मध्यप्रदेश में भी ऐसा हो जाये

राकांपा के 20वें स्थापना दिवस को संबोधित करते हुए शरद पवार ने कहा कि दिल्ली में विपक्षी पार्टियां तकनीकविदों और विशेषज्ञों की उपस्थिति में ईवीएम के मुद्दे पर विचार विमर्श करेंगी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को यह भी बताया कि चुनाव परिणाम आने के बाद से इस मुद्दे पर उनकी कई विशेषज्ञों से बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि पोलिंग बूथ पर जब आप ईवीएम में बटन दबाते हैं तो जिसको वोट दिया है वो वीवीपैट स्लिप पर आ जाता है लेकिन मुश्किल यह है कि मतों की गणना ईवीएम से होती है और ऐसे में आपको यह पता ही नहीं लग पाता कि वीवीपैट में किसके नाम से वोट दर्ज हुआ है। ईवीएम पर पवार की शंका तब सामने आयी है जब हालिया लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र की 48 में से 41 सीटों पर भाजपा-शिवसेना गठबंधन विजयी रहा और राकांपा के हिस्से में मात्र चार सीटें ही आईं। यही नहीं पवार की बेटी सुप्रिया सुले बड़ी मुश्किल से अपना चुनाव जीतने में सफल रहीं लेकिन पवार के पोते अपना पहला ही लोकसभा चुनाव हार गये।

 

राकांपा सम्मेलन की खास बात यह रही कि शरद पवार और उनके भतीजे अजीत पवार मंच पर ही एक दूसरे से भिड़ गये। जहाँ शरद पवार लोकसभा चुनावों में पार्टी की हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ रहे थे वहीं अजीत पवार ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वह ईवीएम के मुद्दे पर चर्चा कर अपना समय खराब नहीं करें और विधानसभा चुनावों में पार्टी के अच्छे प्रदर्शन के लिए काम में जुट जायें। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में इसी वर्ष अक्तूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं।

 

दूसरी ओर मायावती लोकसभा चुनाव परिणाम सामने आने के बाद यह आरोप लगा चुकी हैं कि ईवीएम में हेराफेरी की गयी है और जानबूझकर महागठबंधन की कुछ सीटों पर जीत होने दी गयी ताकि किसी को कोई शंका नहीं हो। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कह चुकी हैं कि ईवीएम के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों को साथ आकर लड़ाई लड़नी होगी। चंद्रबाबू नायडू और अरविंद केजरीवाल भी ईवीएम के खिलाफ मुखर रहे हैं। उम्मीद है जब दिल्ली में विपक्षी मजमा जुटेगा तो यह दोनों भी उसमें शामिल हों।

इसे भी पढ़ें: क्यों बनाई जाती हैं मंत्रिमंडलीय समितियाँ ? क्या होते हैं इनके अधिकार ?

देखा जाये तो विपक्षी राजनीतिक दल ईवीएम पर सवाल उठा कर उन 22 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं का अपमान कर रहे हैं जिन्होंने भाजपा और राजग के लिए मतदान किया। हमारे निर्वाचन आयोग की साख पूरी दुनिया में है और संयुक्त राष्ट्र की ओर से भी भारतीय निर्वाचन आयोग के अधिकारियों को विभिन्न देशों में पर्यवेक्षक के तौर पर भेजा जाता है। जिस ईवीएम पर विपक्ष समय-समय पर सवाल उठाता है उसी ईवीएम की बदौलत विपक्षी पार्टियों को समय-समय पर अलग-अलग राज्यों में जीत भी मिली है। यह कहां का न्याय हुआ कि आपके मन मुताबिक नतीजे आये तो ईवीएम ठीक है और यदि मन मुताबिक नतीजे नहीं आये तो ईवीएम खराब है। जब चुनाव आयोग की ओर से ईवीएम से छेड़छाड़ करने की चुनौती बार-बार देने के बावजूद कोई ऐसा नहीं कर पाया तो साफ है कि सारे आरोप बेबुनियाद हैं। विपक्ष को अपनी हार के कारणों की वास्तविक समीक्षा करनी चाहिए वरना उनके लिए ईवीएम सदैव खराब ही रहेगी।

 

-नीरज कुमार दुबे

 

All the updates here:

प्रमुख खबरें

Bangladesh की नई BNP सरकार का शपथ ग्रहण, India-China समेत 13 देशों को भेजा न्योता

Team India का सपना, एक पारी से स्टार बने Vaibhav Sooryavanshi ने Cricket Career के लिए छोड़ी Board Exam

Asia Cup में Team India की शानदार वापसी, Pakistan को 8 विकेट से हराकर चखा पहली जीत का स्वाद

T20 World Cup 2026: Ishan Kishan के तूफान में उड़ी पाकिस्तानी टीम, भारत की धमाकेदार जीत