CCS की बैठक में हालात की समीक्षा के बाद मोदी ने सामने रखा नया मास्टर प्लान, संकट का असर भारत पर नहीं पड़ने देगी सरकार

By नीरज कुमार दुबे | Apr 02, 2026

पश्चिम एशिया में भड़कती युद्ध की आग ने पूरी दुनिया को झुलसा दिया है, लेकिन इस वैश्विक संकट के बीच भारत में हालात को नियंत्रित रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह चौबीसों घंटे मोर्चा संभाले हुए हैं, वह अपने आप में एक मजबूत और निर्णायक नेतृत्व की मिसाल बन चुका है।

बुधवार शाम प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में साफ संदेश दिया गया कि देश के नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए हर स्तर पर पूरी ताकत झोंक दी जाएगी। हम आपको बता दें कि ऊर्जा, कृषि, उर्वरक, उड्डयन, जहाजरानी और रसद जैसे अहम क्षेत्रों पर बारीकी से नजर रखी जा रही है ताकि कहीं भी आपूर्ति श्रृंखला टूटने न पाए।

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सबसे बड़ा खतरा ऊर्जा क्षेत्र में था। होरमुज मार्ग पर ईरान के नियंत्रण के कारण तेल और गैस की आपूर्ति पर गहरा संकट मंडरा रहा था। लेकिन सरकार ने तुरंत रणनीति बदली और विभिन्न देशों से गैस और एलपीजी की आपूर्ति के नए स्रोत तलाशने शुरू कर दिए। साथ ही घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस की कीमतों को स्थिर रखना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि वैश्विक बाजार में कीमतें बेकाबू हैं।

इसके अलावा, सिर्फ आपूर्ति सुनिश्चित करना ही काफी नहीं था। जमाखोरी और कालाबाजारी जैसे पुराने रोग संकट के समय और खतरनाक हो जाते हैं। इसीलिए सरकार ने सख्त निगरानी, छापेमारी और कड़े कानूनी कदमों के जरिए इन पर लगाम कस दी है। राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि उर्वरकों की कालाबाजारी और डायवर्जन पर तुरंत कार्रवाई करें।

खेती का मोर्चा भी उतना ही संवेदनशील है। खरीफ और रबी दोनों मौसमों के लिए उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन बनाए रखने और विदेशों से आपूर्ति समन्वय करने के प्रयास तेज किए गए हैं। अगर यह मोर्चा कमजोर पड़ता, तो सीधे तौर पर देश की खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ जाती।

इसी के साथ खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। नियंत्रण कक्ष स्थापित कर राज्यों के साथ लगातार संवाद किया जा रहा है ताकि जरूरी वस्तुओं की कीमतें नियंत्रण में रहें। यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार केवल संकट को देख नहीं रही, बल्कि हर छोटे बड़े पहलू को पकड़कर उसे नियंत्रित कर रही है।

सबसे अहम बात जो प्रधानमंत्री ने बार बार दोहराई, वह है सूचना का प्रबंधन। युद्ध के समय अफवाहें किसी बम से कम नहीं होतीं। इसीलिए जनता तक सही और समय पर जानकारी पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है। गलत सूचनाओं और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त नजर रखी जा रही है।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक स्तर पर भी सक्रिय कूटनीति का प्रदर्शन किया है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस, नीदरलैंड, मलेशिया, इजराइल और ईरान तक, लगातार संवाद के जरिए भारत ने अपने हितों को सुरक्षित रखने का प्रयास किया है। अमेरिका के राष्ट्रपति से भी बातचीत कर उन्होंने इस संकट पर व्यापक दृष्टिकोण साझा किया।

यह स्पष्ट है कि यह युद्ध केवल गोलियों और मिसाइलों तक सीमित नहीं है। यह आर्थिक, ऊर्जा और आपूर्ति तंत्र का युद्ध भी है। लेकिन भारत ने इस चुनौती को अवसर में बदलने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण, आपूर्ति श्रृंखला का पुनर्गठन और घरेलू व्यवस्थाओं को मजबूत करना इसी रणनीति का हिस्सा है।

हम आपको बता दें कि सीसीएस की बैठक में कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने पेट्रोलियम उत्पादों, विशेष रूप से एलएनजी, एलपीजी, और बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी बैठक में उपस्थित थे। ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर, खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी, नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी इस बैठक में उपस्थित थे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल और प्रधानमंत्री के दो प्रधान सचिव पीके मिश्रा और शक्तिकांत दास भी उपस्थित थे। 

बैठक में जानकारी दी गई कि पाइपलाइन के माध्यम से प्राकृतिक गैस कनेक्शन का विस्तार करने के लिए पहल की गई है। गर्मी के महीनों के दौरान बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 7-8 गीगावॉट क्षमता वाले गैस आधारित बिजली संयंत्रों को गैस पूलिंग तंत्र से छूट देना और ताप विद्युत संयंत्रों पर अधिक कोयले की आपूर्ति के लिए रेक बढ़ाना जैसे उपाय भी किए गए हैं। बैठक में यह भी बताया गया कि उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए यूरिया उत्पादन को आवश्यकताओं के अनुरूप बनाए रखने, डीएपी/एनपीकेएस आपूर्तिकर्ताओं के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित करने जैसे प्रयास किए जा रहे हैं। बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया है कि राज्य सरकारों से आग्रह किया गया है कि वे दैनिक निगरानी, छापेमारी और सख्त कार्रवाई के माध्यम से उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और हेराफेरी पर अंकुश लगाएं।

देखा जाये तो आज जब दुनिया के कई देश इस संकट के आगे घुटने टेकते नजर आ रहे हैं, भारत ने संयम, साहस और रणनीति के साथ स्थिति को संभालने का उदाहरण पेश किया है। प्रधानमंत्री मोदी का यह आक्रामक लेकिन संतुलित दृष्टिकोण यह दिखाता है कि संकट चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, अगर नेतृत्व मजबूत हो तो देश सुरक्षित रह सकता है।

बहरहाल, युद्ध की आग भले ही हजारों किलोमीटर दूर जल रही हो, लेकिन उसकी तपिश हर भारतीय तक पहुंच सकती थी। फर्क सिर्फ इतना है कि देश के शीर्ष पर बैठा नेतृत्व उस तपिश को दीवार बनकर रोक रहा है और यही इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी कहानी है।

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