By अभिनय आकाश | Aug 18, 2026
कॉकरोच जनता पार्टी के बाद अब एक नई पार्टी उतरी है। नाम है दिमागी नक्सल पार्टी। तरीका वही कॉकरोच पार्टी की तरह एक स्टेटमेंट से उपजी है। कॉकरोच जनता पार्टी का उदय भी एक कमेंट से ही आया था। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कथित तौर पर युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी। इसके तुरंत बाद कॉकरोच जनता पार्टी नाम का इंस्टाग्राम हैंडल तैयार हुआ। देखते ही देखते कुछ दिनों कॉकरोच जनता पार्टी के पेज पर करोड़ों यूजर्स आ गए। आलम ये हुआ की 10 दिन के अंदर CJP के फॉलोअर्स 20 मिलियन से भी ज्यादा हो गए। इसी तरह अब पीएम मोदी के रिमार्क पर किसी ने दिमागी नक्सल जनता पार्टी के नाम से पेज बना दिया है और ये लगातार फॉलोअर्स बटोर रहा है।
15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में एक शब्द ने सोशल मीडिया पर अलग ही हलचल पैदा कर दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि जंगलों में हथियार उठाने वाले नक्सलियों के खिलाफ देश ने बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन अब भी ऐसे ‘दिमागी नक्सली’ मौजूद हैं, जो विचारधारा के जरिए देश में अशांति फैलाने के मौके तलाश रहे हैं। उन्होंने ऐसे लोगों को पहचानने और अलग-थलग करने की बात कही।
इंस्टाग्राम बायो में संस्थापक को एक दिमागी भारतीय और सह संस्थापक को 56 इंच वाले के तौर पर बताया गया है। हालांकि इन नामों के पीछे वास्तविक व्यक्ति कौन है? इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पार्टी के इंस्टाग्राम पोस्ट में खुद को शहीद भगत सिंह की विचारधारा का अनुयाय बताया गया है। एक पोस्ट में कहा गया है कि संगठन खुद को भगत सिंह की सोच से जोड़ता है और अगर उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स को बंद करने या उसके सदस्यों को देशद्रोही बताने की कोशिश की जाती है तो इसे भगत सिंह की विचारधारा का अपमान माना जाएगा। हालांकि इस डिजिटल पहल के संस्थापक या संचालकों की आधिकारिक पहचान अब तक सामने नहीं आई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इसका एक्स अकाउंट अगस्त 2026 में बनाया गया था। दिमागी नक्सल पार्टी का इंस्टाग्राम अकाउंट कई चर्चित और मुखर सार्वजनिक हस्तियों को फॉलो करता है। इनमें कॉमेडियन कुणाल कामरा, वेंकार श्याम रंगीला, यूबर ध्रुव राठी, अभिनेता प्रकाश राज, फिल्मकार अनुराग कश्यप, अभिनेत्री सुनाक्षी सिन्हा, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और पत्रकार रवश कुमार जैसे नाम शामिल है। इसी वजह से सोशल मीडिया पर इसकी तुलना हाल में चर्चा में कॉकरोच जनता पार्टी से भी की जाने लगी है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि उन्हें दिमागी नक्सल कहे जाने पर गर्व है। उन्होंने इस शब्द को अर्बन नक्सल आंदोलनजीवी और टुकड़े-टुकड़े गैंग जैसे राजनीतिक विश्लेषणों की कड़ी का नया रूप बताया। वहीं कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी प्रधानमंत्री के बयान को लेकर हमला बोला और इसे सरकार की राजनीतिक हताशा का संकेत दिया। या दिमागी नक्सल दिमागी नक्सल कौन है जो इनका विरोध करते हैं यही तो दिमागी नक्सल ने मांग की थी ना जाती जनगणना होनी चाहिए 4 साल तक कहा नहीं होगा नहीं होगा नहीं होगा यह अर्बन नक्सल सोच है पर एक साल पहले अप्रैल 30 2025 को उन्होंने घोषणा की कि जातीय जनगणना होगा तो ये सब बदनाम करने में प्रधानमंत्री बहुत माहिर हैं। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने अपनी पोस्ट में पीएम मोदी के तंज पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा प्रधानमंत्री जी, दिमागी नक्सल या ऐसी कोई भी बात काम नहीं आएगी। आप पढ़े-लिखे युवाओं को नक्सली कैसे कह सकते हैं? सिर्फ इसलिए कि वे आपकी सरकार से सवाल पूछते हैं? यह सरासर अहंकार है। उनकी समस्याओं को हल करने में पूरी तरह नाकामी है। बदलाव की घंटी बज चुकी है। जागने का समय आ गया है।
बीजेपी की तरफ से इस पर क्लेरिफिकेशन आया है। राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने एक टीवी डिबेट में समझाया कि दिमागी नक्सल है कौन? 1.8 और 2% ग्रोथ रेट जिसे हिंदू ग्रोथ रेट कहा जाता था। उसमें देश बड़ा सुंदर और सामंजस्यपूर्ण लगता था। 7.4% की वर्ल्ड की फास्टेस्ट ग्रोथ रेट में उसे सामंजस्य नजर नहीं आता है। उसको दिमागी नक्सल कहा जाता है। सीएए में जिसको यह नजर आता था कि ये नागरिकता लेने का कानून है। आज 5 साल लागू हो गए हो गए। किसी मुस्लिम की नागरिकता नहीं गई। उसमें नक्सल उसके दिमाग को दिमागी नक्सल कहा जा सकता है। जिसको जय श्री राम में वॉर क्राई नजर आता हो मगर सर तन से जुदा हो जाने के बाद भी उसमें सेुकुलर संगीत नजर आता हो तो उसको दिमागी नक्सल कहा जाता है।
वेबसाइट पर लिखा है दिमागी बनो बेवकूफ नहीं। डीएनजेपी दिमागी नक्सल जनता पार्टी ने अपने बारे में बताया कि ना तो हम कांग्रेस हैं ना आम आदमी पार्टी ना समाजवादी पार्टी और ना ही कोई कॉकरोच पार्टी। फिर भी इसे इन सभी के साथ चलने में कोई परहेज नहीं है। बस एक ही नियम है सवाल पूछा जाए। पार्टी का अपना एक मेनिफेस्टो भी है। छह नियम है। पहला चाहे सरकार कोई भी हो, पार्टी कोई भी हो, सवाल पूछा जाना चाहिए। बस यही इसका मकसद है। दूसरा, हम आपसे अपनी पार्टी बदलने को नहीं कह रहे हैं। हम बस इतना कह रहे हैं कि हर तरह के सवाल पूछने वाले लोग एक दूसरे को दुश्मन समझना बंद करें। डीएनजेपी के पास ना कोई झंडा है ना कोई तय फॉनट और ना ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाला कोई फाउंडर है। जिस आंदोलन को जिंदा रहने के लिए किसी स्पोक पर्सन की जरूरत पड़े वो आंदोलन नहीं महज एक बैठक है। आप इसे गाली की तरह इस्तेमाल करेंगे। हम दोपहर तक इसे अपना नारा बना लेंगे।