क्रूज मिसाइलों वाला ड्रोन, 700 KM रेंज, तुर्किए ने क्या तबाही बना ली?

By अभिनय आकाश | Aug 18, 2026

ईरान की युद्ध नीति की दुनिया मुरीद हो चुकी है। छोटे देश हो या फिर बड़े ड्रोन युद्ध नीति ने दिशा और दशा बदल दी है। यही वजह है कि हर देश सस्ते और खतरनाक ड्रोन की दौड़ में आ चुका है। तुर्की ने अपने सबसे आधुनिक स्टील कॉम्बैट ड्रोन अंका थ्री का एक ऐसा घातक संस्करण तैयार किया जो भविष्य के हवाई युद्ध के पूरे गणित को हिला सकता है। लगभग 700 किलोमीटर तक मार करने वाली सुपर लाइटनिंग पीयूष मिसाइलों से लैस यह ड्रोन अब अकेला नहीं बल्कि इंसानी पायलटों के साथ मिलकर जंग लड़ेगा। तुर्की ने इस ड्रोन को ऐसे वक्त में दिखाया जब इसराइल से रिश्ते बेहद खतरनाक मोड़ पर हैं। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान और इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन ने नेतन्याहू के बीच जुबानी जंग भी चल रही थी। इजरायली टेक्नोलॉजी दुनिया भर में मशहूर है। तुर्की रक्षा क्षेत्र में अपनी करामात के लिए जाना जाता है। ऐसे में दुनिया इस ड्रोन को दूसरे नजरिए से भी देखने लगी। 

ग्लोबल डिफेंस मार्केट में तुर्की जिस तरीके से अपने ड्रोन इकोसिस्टम जैसे बायर कटार टीवी2 किजिलमा और अब अंकात्री को मजबूत कर रहा है उसने बड़ी महाशक्तियों की चिंता बढ़ा दी। भविष्य के आसमान में अब कोई फाइटर पायलट अकेले जंग में नहीं उतरेगा बल्कि उसके इर्द-गिर्द स्वायत्त स्टेल्ट ड्रोन की अदृश्य ढाल और हमलावर दस्ता मौजूद होगा। अंका 3 ने यह साबित किया है कि हवाई युद्ध का अगला दौर इंसानों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साझा तालमेल पर टिका होगा। ऐसे में अब इसराइल के साथ जिस तरीके से जुबानी जंग हाल फिलहाल में देखी गई। इसके अलावा तुर्की के मंत्री हकान फिदान ने जिस तरीके से अपनी एक फोटो के जरिए इसराइल को चेतावनी देने की कोशिश की उससे यह साफ हो रहा है कि आने वाला युद्ध कहीं ना कहीं ड्रोन वारफेयर होगा। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि ईरान की ड्रोन क्रांति की दुनिया अब मुरीद हो गई और टू ही ड्रोनों की दौड़ अब खतरनाक होती जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने फैसले से पूरी दुनिया को चौंका दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट साझा कर अमेरिकी रक्षा मंत्रालय को दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यासों के पैमानों में भारी कटौती करने का निर्देश दिया है। 

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ट्रंप ने इसके पीछे ना केवल भारी वित्तीय लागत को वजह बताया बल्कि उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ अपने बेहतरीन व्यक्तिगत संबंधों का भी हवाला दिया। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप का ये दांव ऐसे समय में सामने आया जब अमेरिकी विदेश नीति इतिहास के सबसे जटिल कूटनीतिक संकट से गुजर रही है। वाशिंगटन इस समय एक तरफ उत्तर कोरिया और दूसरी तरफ ईरान के दोहरे मोर्चे पर उलझा हुआ है। दोनों ही मोर्चों पर ना तो युद्ध और ना ही शांति को लेकर कोई बातचीत फाइनल हो पा रही है और ना ही कोई ठोस समझौता धरातल पर उतरता हुआ दिखाई दे रहा है। ट्रंप के इस ताजा फैसले ने दक्षिण कोरिया की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। 

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