By रेनू तिवारी | Jul 07, 2026
गुजरात हाई कोर्ट ने मंगलवार को एक बेहद ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साल 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों के मामले में निचली अदालत के फैसले पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है। अदालत ने इस जघन्य आतंकी हमले के सभी 38 दोषियों की मौत की सजा (Capital Punishment) को बरकरार रखा है। इसके साथ ही मामले में दोषी पाए गए अन्य 11 आतंकवादियों की उम्रकैद की सजा भी जारी रहेगी। हाई कोर्ट ने इस फैसले के जरिए आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' का कड़ा संदेश दिया है। सीरियल ब्लास्ट केस में, गुजरात हाई कोर्ट ने मारे गए 56 लोगों के परिवारों को 10 लाख रुपये और 200 से ज़्यादा घायल पीड़ितों को 1 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का भी आदेश दिया।
26 जुलाई 2008 को, अहमदाबाद में लगभग 70 मिनट के अंदर 20 जगहों पर 21 सीरियल बम धमाके हुए, जिससे पूरे शहर में दहशत फैल गई। इस आतंकी हमले में 56 लोगों की मौत हो गई, जबकि धमाकों में 200 से ज़्यादा लोग घायल हो गए।
इस्लामिक आतंकी संगठन हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी (HuJI) ने इन हमलों की ज़िम्मेदारी ली थी। इस बीच, दिल्ली के लाल किले में हुए धमाके के मामले में भी एक और जांच चल रही है, जिसमें नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने धमाके में मारे गए लोगों के शरीर के अंगों से जुड़ी फोरेंसिक रिपोर्ट दाखिल की है।
कोर्ट ने फोरेंसिक रिपोर्ट की जांच के लिए मामले को लिस्ट किया। NIA के मुताबिक, तेज़ धमाके वाले VBIED (गाड़ी में रखे गए इम्प्रोवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) धमाके में 11 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए, साथ ही आस-पास की संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुँचा।
NIA ने नौ आरोपियों को स्पेशल जज (NIA) पीतांबर दत्त के सामने पेश किया, जिन्होंने उनकी न्यायिक हिरासत को अगली तारीख तक बढ़ा दिया। कोर्ट ने मामले को 13 जुलाई के लिए लिस्ट किया है। NIA पहले ही शाहीन सईद और अन्य सहित 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। ज़मीर अहमद अहंगर और तुफैल अहमद भट के खिलाफ दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर भी पटियाला स्थित NIA कोर्ट में विचार किया जाना बाकी है। NIA ने नवंबर 2025 के दिल्ली ब्लास्ट केस में ज़मीर अहमद अहंगर, तुफ़ैल अहमद भट और एक फ़रार आरोपी के ख़िलाफ़ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की है। ज़मीर और तुफ़ैल को फ़रवरी 2026 में गिरफ़्तार किया गया था। एजेंसी इस मामले में पहले ही मुख्य चार्जशीट दायर कर चुकी है। आरोप है कि ज़मीर और तुफ़ैल हथियार और गोला-बारूद इकट्ठा कर रहे थे।
ज़मीर को उमर, इरफ़ान और आदिल ने एक राइफ़ल, एक पिस्तौल और ज़िंदा कारतूस दिए थे। ये तीनों 'अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद' से जुड़े हैं। यह मामला नवंबर 2025 में लाल क़िले के पास हुए कार बम धमाके से जुड़ा है।