By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Feb 17, 2026
उद्योग संगठन नैसकॉम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्रमुख अंकित बोस ने मंगलवार को कहा कि दुनिया भर में एआई का तेज विकास भारतीय कंपनियों के लिए बड़े अवसर उत्पन्न कर रहा है और इससे उनके कारोबार पर नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
भारत में कामकाज की प्रकृति बदलेगी
उन्होंने कहा कि नौकरियों में कटौती की जगह भारत में कामकाज की प्रकृति बदलेगी क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग के साथ भूमिकाएं भी बदलेंगी। बोस ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में कहा, ‘‘ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पूरी दुनिया में विकसित हो रही है लेकिन इसे क्रियान्वित कौन करेगा... इसके लिए लोगों की जरूरत है।
अब भारत क्षमता बढ़ा रहा है। व्यापक स्तर पर एआई का इस्तेमाल किया जा रहा है और भारतीय पेशेवर इसे क्रियान्वित करेंगे। यह हमारे लिए बड़ा अवसर है लेकिन हमें समय से आगे रहना होगा और अपनी क्षमताओं को लगातार निखारना होगा।’’ अंकित बोस ने यहां ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ के एक सत्र से इतर बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा कि क्षमता निर्माण के लिए सरकार और निजी क्षेत्र कदम उठा रहे हैं।
कुछ महीनों में हम करीब डेढ़ लाख एआई विकास कार्य करेंगे
बोस ने कहा, ‘‘ आने वाले कुछ महीनों में हम करीब डेढ़ लाख लोगों को कृत्रिम मेधा आधारित विकास कार्यों के लिए सक्षम बनाएंगे। हम सरकार के साथ मिलकर कॉलेज के लिए जरूरी पाठ्यक्रम भी तैयार कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि इस तेजी से बढ़ती प्रौद्योगिकी के कारण घरेलू या वैश्विक कंपनियों को सेवाएं देने वाली भारतीय कंपनियों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। वास्तव में ये कंपनियां आगे बढ़ेंगी।
बोस ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कृत्रिम मेधा के इस्तेमाल के लिए अधिक लोगों की जरूरत है और इसमें भारत की बड़ी ताकत है, हालांकि अल्प अवधि में कुछ उतार-चढ़ाव संभव है। ये टिप्पणियां अहम हैं क्योंकि भारत, सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रौद्योगिकी आधारित सेवाओं का बड़ा निर्यातक है। सत्र में सिफी टेक्नोलॉजीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक राजू वेगेसना ने कहा कि कृत्रिम मेधा के मोर्चे पर अभी लंबा रास्ता तय करना है। राजू ने भारत में आंकड़ा केंद्रों के लिए बिजली आपूर्ति की उपलब्धता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘ कृत्रिम मेधा कोई परियोजना नहीं है, यह एक यात्रा है। इसमें काफी समय लगेगा।