By अनन्या मिश्रा | Apr 22, 2026
तमिलनाडु की राजनीति में कभी अजेय मानी जाने वाली ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम राज्य विधानसभा चुनाव में अपने अस्तित्व और प्रभाव को बचाए रखने की जद्दोजहद में बनी हुई है। पूर्व सीएम जे जयललिता के निधन के बाद पार्टी नेतृत्व संकट में फंस गई। जिससे वह अब तक नहीं उबर पाई है। क्योंकि जयललिता सिर्फ एक राजनीतिक नेता नहीं थी। बल्कि वह AIADMK की केंद्रीय धुरी भी थीं।
इसके अलावा वी.के शशिकला की वापसी की अटकलों ने आंतरिक अस्थिरता को अधिक बढ़ाया। साल 2019 के लोकसभा चुनाव और साल 2021 के विधानसभा चुनाव में AIADMK पार्टी को सत्ता से बाहर रहना पड़ा। इन चुनावों में मिली हार ने यह स्पष्ट कर दिया कि सिर्फ 'अम्मा' की विरासत के सहारे राजनीति करना अब पर्याप्त नहीं है। खासकर युवाओं और शहरी वर्ग, मतदाताओं, विकास, रोजगार और सामाजिक न्याय के नए मुद्दों को प्राथमिकता मिली है।
भाजपा के साथ गठबंधन कर AIADMK ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास किया है। लेकिन तमिलनाडु की क्षेत्रीय राजनीति में बीजेपी के साथ हमेशा समीकरण सही नहीं रहे हैं। पार्टी के अंदर इस गठबंधन को लेकर मतभेद देखने को मिले हैं। वहीं विश्लेषकों की मानें, तो AIADMK पार्टी को अपने स्वतंत्र क्षेत्रीय पहचान को मजबूत करने के साथ संतुलित गठबंधन रणनीति अपनानी होगी।
साल 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव AIADMK पार्टी के लिए अस्तित्व की लड़ाई की तरह है। पार्टी के सामने संगठनात्मक ढांचे का पुनर्गठन, एकजुट और स्वीकार्य नेतृत्व का निर्माण और युवा और महिला मतदाताओं के बीच भरोसा पुनर्स्थापित करना आदि जैसी कई बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे में अगर AIADMK इन तीनों मोर्चों पर सफल होती है, तो पार्टी वापसी की राह पकड़ सकती है। अन्यथा, राज्य की राजनीति में पार्टी का प्रभाव और सीमित हो सकता है।