By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 16, 2026
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने मंगलवार को आरोप लगाया कि धर्म और राम मंदिर के नाम पर फैलाए गए “डर, हिंसा और नफरत” का सबसे अधिक नुकसान अयोध्या-फैजाबाद के आम लोगों को हुआ है। फैजाबाद प्रेस क्लब में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बोरा ने कहा कि 1990 के दशक में शुरू हुआ ‘‘नफरत का अभियान’’ अयोध्या को डर का केंद्र बना गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने बच्चों और युवाओं को इस अभियान का हिस्सा बनाया, वे आज उत्तर प्रदेश में सत्ता में हैं।
बोरा ने राम मंदिर के चंदे में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि धर्म का इस्तेमाल राजनीतिक और आर्थिक लाभ के लिए किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिरों में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाया जाने वाला चढ़ावा धर्म या मंदिरों के बजाय सत्ता में बैठे लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की “बुलडोजर न्याय” व्यवस्था की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि जिन लोगों के घर गिराए गए, उनमें गरीब, दलित और मुस्लिम परिवारों समेत आम लोग शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि “सत्ता का प्रतीक” बना बुलडोजर प्रदेश के लोगों की बेबसी का भी प्रतीक है। बोरा ने कहा कि अयोध्या के लोग “हिंसा, नफरत और लूट” से छुटकारा चाहते हैं। आइसा अध्यक्ष अयोध्या में संगठन के उत्तर प्रदेश में चल रहे ‘जेन-जी महाजुटान’ अभियान के तहत पहुंची थीं।
अभियान के तहत बेरोजगारी, महंगाई, सामाजिक न्याय और सरकारी भर्ती परीक्षाओं तथा नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों को उठाया जा रहा है। आइसा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मनीष ने बताया कि अभियान बुधवार को लखनऊ पहुंचेगा, जहां संवाददाता सम्मेलन के बाद रायबरेली और अलीगढ़ का दौरा किया जाएगा।