By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 06, 2026
नयी दिल्ली, छह नवंबर चीनी कारोबारियों के संगठन एआईएसटीए ने सरकार से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 31 रुपये से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति किलोग्राम करने की मांग की है। यह मांग ऐसे समय की गई है, जब एक समिति गन्ना किसानों के असंतोष के कारणों की जांच कर रही है। अखिल भारतीय चीनी व्यापार संघ (एआईएसटीए) ने सरकार द्वारा तय गन्ने के मूल्य को ‘‘उचित और न्यायसंगत’’ बताते हुए इसका समर्थन भी किया है।
संगठन ने 13 अक्टूबर को गठित चार सदस्यीय समिति के समक्ष एक प्रस्तुति में ये मांगें रखीं। नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता वाली यह समिति मुख्य रूप से कर्नाटक और महाराष्ट्र में प्रदर्शन कर रहे गन्ना किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए बनाई गई है। समिति ने चार नवंबर को बेंगलुरु और उसके बाद पुणे में गन्ना किसानों से मुलाकात की।
एआईएसटीए का एक प्रतिनिधिमंडल पुणे में हुई बैठक में शामिल हुआ। एआईएसटीए के चेयरमैन प्रफुल विठलानी ने कहा कि चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य फरवरी 2019 से नहीं बदला है। इसे कम से कम 4,200 रुपये प्रति क्विंटल किया जाना चाहिए, ताकि चीनी मिलें अपनी उत्पादन लागत से कम कीमत पर चीनी न बेचें।
सरकार ने पांच मई को 2026-27 के चीनी सत्र (अक्टूबर-सितंबर) के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। यह मूल्य 10.25 प्रतिशत की मूल चीनी ‘रिकवरी दर’ से जुड़ा है। विठलानी ने कहा कि उस समय संबंधित पक्षों ने इस मूल्य को व्यापक रूप से स्वीकार किया था।
उन्होंने बयान में कहा, ‘‘हमें इस समय उसी मुद्दे पर आंदोलन करने का कोई कारण नजर नहीं आता।’’ एआईएसटीए ने साथ ही कहा कि भारत में गन्ने की कीमतें दुनिया में सबसे अधिक कीमतों में शामिल हैं। संगठन ने समिति से गुजरात में इस्तेमाल की जा रही भुगतान व्यवस्था का अध्ययन करने का आग्रह किया। इसके प्रस्तावित दो स्तरीय मॉडल के तहत किसान यह विकल्प चुन सकते हैं कि गन्ने की आपूर्ति के सात से 14 दिन के भीतर उन्हें पूरा एफआरपी मिल जाए या तीन किस्तों में भुगतान स्वीकार करने पर एफआरपी के साथ 10 प्रतिशत अतिरिक्त राशि मिले।
उद्योग ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने के सरकार के कार्यक्रम के तहत एथनॉल आसवन संयंत्र बनाने के प्राप्त किए गए कर्ज के मामले में भी राहत मांगी है। एआईएसटीए ने कहा कि खराब मौसम के कारण चालू और अगले चीनी सत्र में अतिरिक्त ‘सुक्रोज’ की उपलब्धता सीमित रहने की आशंका है। इससे एथनॉल का उत्पादन घटेगा और मिलों के लिए कर्ज चुकाना मुश्किल हो जाएगा।
संगठन ने प्रभावित चीनी आधारित एथनॉल परियोजनाओं के लिए मूलधन और ब्याज के भुगतान पर दो साल की रोक लगाने की मांग की है। साथ ही, उसने कहा है कि इस अवधि में कर्ज को फंसे कर्ज में बदलने से रोकने के लिए सरकार ब्याज सब्सिडी को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करे।