आर्टिकल 370 के हटने के बाद एक्शन मोड में रहे अजीत डोभाल, कश्मीर में हालात को किया सामान्य

By अंकित सिंह | Jul 31, 2020

केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद जम्मू कश्मीर को लेकर कोई भी बैठक हुई हो और उसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता है। यह माना जा रहा है कि भाजपा के केंद्र में आने के बाद से ही जम्मू-कश्मीर की स्थिति को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार होने के नाते अजीत डोभाल ही मॉनिटर करते रहे हैं। ऐसी स्थिति हमने आर्टिकल 370 के हटने के वक्त भी देखा था। जब आर्टिकल 370 हटाए जाने की सुगबुगाहट हो रही थी उस समय अजीत डोभाल भी काफी सक्रिय थे। जानकार अभी भी यही बताते हैं कि आर्टिकल 370 के हटाए जाने को लेकर जितने भी प्लान बने उसमें अजीत डोभाल की राय सबसे प्रमुख रही। कुल मिलाकर हम यह जरूर कह सकते हैं कि कश्मीर को लेकर मोदी सरकार की हर मर्ज की दवा अजीत डोभाल ही हैं। आर्टिकल 370 के हटाए जाने से पहले और उसके बाद जिस तरीके से अजीत डोभाल सक्रिय रहें। इससे इस बात का तो अंदाजा भली-भांति लगाया जा सकता है कि वर्तमान सरकार में उनकी क्या उपयोगिता है। अगर हम यह कहे कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे भरोसेमंद व्यक्तियों में से एक हैं तो इसमें दो राय नहीं होगी।

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इन वीडियोस के वायरल होने के बाद कश्मीर में इस बात को लेकर एक संदेश गया कि भारत सरकार वहां शांति चाहती है और हालात को नियंत्रित करने के पक्ष में है। हालांकि इस बात पर भी बहस अलग से हो सकती है कि कश्मीर को लेकर डोभाल की नीति कितनी कारगर रही। 370 हटाए जाने के कुछ ही दिनों बाद एक स्थानीय अखबार से बातचीत में अजीत डोभाल ने यह दावा किया था कि वह पूरी तरीके से आस्वस्थ है कि कश्मीर की बहुसंख्यक आबादी अनुच्छेद 370 के हटाए जाने के पक्ष में है। सिर्फ कुछ ही लोग हैं जो इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर में सेना की ओर से कोई उत्पीड़न का सवाल ही पैदा नहीं होता। यहां शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए ही सुरक्षाबलों की तैनाती की गई थी। भारतीय सेना सिर्फ और सिर्फ वहां आतंकवाद से लड़ने के लिए मौजूद है।

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डोभाल इस बात को भी मानते हैं कि पाकिस्तान कश्मीर में अशांति फैलाने की नापाक कोशिश में रहता है। स्थानिए नेताओं की नजर बंदी को लेकर भी केंद्र सरकार की खूब आलोचना हुई। पर इसका सबसे पहले जवाब दिया अजीत डोभाल ने ही। डोभाल ने कहा कि कुछ लोगों को एतिहातन के तौर पर हिरासत में लिया गया है। चीजें सामान्य होते ही उन्हें छोड़ दिया जाएगा। इन नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर डोभाल का मानना था कि अगर यह नेता जनसभा करते तो आतंकवादी उसका फायदा उठा सकते थे। प्रतिबंधों के बीच डोभाल लगातार पूरे श्रीनगर की रेकी करते रहते थे। इसके अलावा कश्मीर की जनता और सरकार के बीच वह एक सेतु के रूप में खड़े थे। 5 अगस्त 2019 के बाद भी अजीत डोभाल कश्मीर में डटे रहें ताकि वहां के लोगों को बकरीद और स्वतंत्रता दिवस के मौके पर किसी भी परेशानी का सामना ना करना पड़े।

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डोभाल की कार्यकुशलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह आम से लेकर खास तक सभी के बीच घुल मिल जाते थे। कभी वह आम लोगों के साथ बिरयानी खाते दिख गए तो कभी भेड़ पालकों के साथ बात करते। आर्टिकल 370 के हटने के बाद डोभाल पूरी तरीके से जेम्स बॉन्ड की भूमिका में नजर आ रहे थे। डोभाल इस बात को लेकर सबसे ज्यादा सक्रिय रहे कि कश्मीर की आम जनता में भारत सरकार को लेकर विश्वास पैदा किया जा सके। वह व्यापारियों से भी मिलते जिन्हें सख्ति के कारण नुकसान उठाना पड़ा था। कुल मिलाकर हम यह कह सकते हैं कि कश्मीर को लेकर मोदी सरकार की नीतियों को आम जन तक पहुंचाने में अजीत डोभाल की भूमिका अहम रही और आज भी जारी है। हालांकि इस बात पर भी चर्चा की जा सकती है कि अजीत डोभाल का कश्मीर को लेकर जो नजरिया है वह कितना सही है और कितना कारगर है।

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