By अभिनय आकाश | Aug 31, 2022
जहांगीर नाम भारत के इतिहास का वो नाम है जिसे क्रूरता का परिचायक भी माना जाता है। इसके साथ ही जहांगीर का इंसाफ भी बहुत प्रसिद्ध है। वैसे तो जहांगीर का असली नाम सलीम है औऱ वे मुगल बादशाह अकबर के बड़े बेटे थे। सलीम से पहले अकबर की कोई भी संतान जीवित नहीं बचती थी। इससे दुखी होकर अकबर ने कई मन्नतें मांगी और फिर सलीम को पाया। अकबर ने सलीम का नाम शेख सलीम चिश्ती के नाम पर रखा था। अकबर के बाद तख्त संभालने के उपरांत सलीम को जहांगीर की उपाधि दी गई, जिसका अर्थ होता है दुनिया जीतने वाला।
क्रूरता के किस्से मशहूर
जहांगीर ने अपने एक नौकर का अंगूठा सिर्फ इसलिए कटवा दिया था, क्योंकि उसने नदी के किनारे लगे चंपा के कुछ पेड़ काट दिए थे। उसने नूरजहां की एक कनीज को गड्ढ़े में आधा गड़वा दिया था। उसका कसूर था कि उसे एक किन्नर का चुंबन लेते पकड़ लिया गया था। जहांगीर ने अपने बेटे खुसरो के साथ भी बर्बरता से पेश आए थे। खुसरों ने जब अपने पिता जहांगीर के खिलाफ बगावत की थी तब जंग में वे हार गए। जहांगीर के कहने पर महावत खां ने खुसरो को अंधा कर दिया था।
न्याय की जंजीर
जहांगीर को न्याय की जंजीर के लिए भी याद किया जाता है। ये जंजीर शाहजहां ने सोने की बनवाई थी। जो आगरे के किले शाहबुर्ज और यमुना तट पर स्थित पत्थर के खंबे में लगवाई हुई थी। जहांगीर मुगल वंश का पहला शासक माना जाता है जिसने मराठों को अपनी सेना में उच्च पद प्रदान किया और 1616 ई में अहमदनगर, बीजापुर और गोलकुंडा की संयुक्त सेनाओं को पराजित किया। 1617 ई में जहांगीर ने जैन मंदिरों को बंद करने और जैन साधुओं को साम्राज्य से बाहर निकालने का आदेश दिया किंतु लागू नहीं कर पाया। जैन साधुओं ने भविष्यवाणी की थी कि 2 वर्ष के अंदर जहांगीर का संपूर्ण साम्राज्य नष्ट हो जाएगा।