By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 04, 2026
(पूनम मेहरा) नयी दिल्ली, चार अगस्त मुक्केबाज से पुलिस अधिकारी बने अखिल कुमार ने राष्ट्रमंडल खेलों में रिकॉर्ड प्रदर्शन के लिए मुक्केबाजों की सराहना करते हुए कहा कि भारत की महिला मुक्केबाज पुरुषों की तुलना में ओलंपिक पदक की बेहतर दावेदार हैं और 2028 लॉस एंजिलिस खेलों की समग्र योजना में उन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए। राष्ट्रमंडल खेल 2006 में स्वर्ण पदक जीतने वाले एकमात्र भारतीय मुक्केबाज अखिल ने पीटीआई को टेलीफोन पर दिए साक्षात्कर में कहा कि वह ग्लास्गो में देश के प्रदर्शन से काफी प्रभावित हैं जहां भारत ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हुए सात स्वर्ण पदक जीते जिसमें से छह महिला मुक्केबाजों के नाम रहे। महिला मुक्केबाजी को राष्ट्रमंडल खेलों में 2014 में शामिल किया गया और शुरुआत में इसमें सिर्फ तीन वर्ग थे- 51 किग्रा, 60 किग्रा और 75 किग्रा।
वजन वर्ग भी बढ़ रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए। मौजूदा पुरुष मुक्केबाजों में मुझे नहीं लगता कि कोई ऐसा है जो इस चरण पर ओलंपिक पदक विजेता बन सकता है। अगर आगे चलकर बहुत अधिक सुधार होता है जिसकी मुझे उम्मीद है तो मैं अपनी राय बदल लूंगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस समय महिला मुक्केबाजों को बढ़त हासिल है।
हमने इस खेल के विस्तार को काफी अच्छे से अपनाया है और जिस तरह से इसका विकास हुआ है मुझे लगता है कि भारत 2028 में महिला मुक्केबाजी में एक से अधिक ओलंपिक पदक जीतने के लिए बेहतर स्थिति में है।’’ ग्लास्गो में हुए राष्ट्रमंडल खेलों के कार्यक्रम में महिलाओं के लिए सात वजन वर्ग शामिल थे जो पिछली बार की तुलना में एक अधिक था। पुरुषों की स्पर्धा में भी सात वर्ग थीजिससे पहली बार लैंगिक समानता हासिल हुई। ये वजन वर्ग वे थे जो 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में भी होंगे।
भारतीय महिलाओं ने सभी सात वजन में पदक जीते जिसमें छह स्वर्ण और एक रजत शामिल रहा। भारतीय पुरुषों ने दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। इस बार महिलाओं के वर्ग में 43 देशों की 70 मुक्केबाजों जबकि पुरुषों के वर्ग में 43 देशों के 131 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
जब उनसे उन मुक्केबाजों के बारे में पूछा गया जिन्होंने प्रतियोगिता के दौरान अच्छा प्रदर्शन किया तो पूर्व एशियाई चैंपियन ने कहा कि स्वर्ण पदक जीतने वाली जैस्मिन लंबोरिया (57 किग्रा) और साक्षी चौधरी (51 किग्रा) ने बेहतरीन और हिम्मत वाला खेल दिखाया। पुरुषों में उन्हें जादुमणि सिंह (55 किग्रा) में काबिलियत दिखी जिन्होंने रजत पदक जीता था। उन्होंने कहा, ‘‘मैं लंबे समय से कहता आ रहा हूं कि जैस्मिन कितनी अच्छी मुक्केबाज हैं इसलिए उनके स्वर्ण पदक जीतने पर मुझे हैरानी नहीं है।
साक्षी का प्रदर्शन भी चौंकाने वाला और शानदार रहा। जादुमणि में जबरदस्त रफ्तार और सही ताकत है और उन्हें पता है कि दूरी कैसे बनाए रखनी है। वह बहुत आत्मविश्वास से भरे बाएं हाथ के मुक्केबाज हैं और उनमें आगे बढ़ने की काबिलियत है।’’ अखिल ने कहा, ‘‘लेकिन हमें यह याद रखना चाहिए कि एशियाई खेलों में जापान और कोरिया के साथ-साथ ये सभी स्तान देश (खासकर उज्बेकिस्तान और कजाखस्तान) भी मुकाबले में होंगे।
देखते हैं कि हम उस चुनौती का सामना कैसे करते हैं।