By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 14, 2026
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की एथनॉल मिश्रित ईंधन नीति की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने एथनॉल को मुनाफाखोरी का एक नया नाम बताते हुए आरोप लगाया कि यह सरकार, एथनॉल उत्पादकों और तेल कंपनियों के बीच की एक ऐसी साझेदारी है जो सरकारी स्तर पर मिलावट को बढ़ावा दे रही है।
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि कम माइलेज मिलने की वजह से आम जनता को अपनी गाड़ियों में अधिक ईंधन भरवाना पड़ रहा है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। इसके अलावा, एथनॉल युक्त ईंधन के कारण गाड़ियां अक्सर बीच रास्ते में खराब हो रही हैं, जिससे उनके रखरखाव और समय-समय पर होने वाली मरम्मत का खर्च भी काफी बढ़ गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री के अनुसार, इस नीति का असर वाहनों की कुल उपयोग अवधि पर भी पड़ रहा है और उनके पुनर्विक्रय मूल्य यानी रिसेल वैल्यू में भी गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा कि एथनॉल के कारण वाहनों के पुर्जों में जंग लगने और अन्य तकनीकी खराबियां पैदा होने की घटनाएं बढ़ गई हैं।
सपा प्रमुख ने यह भी रेखांकित किया कि पुरानी गाड़ियां एथनॉल मिश्रित ईंधन की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं बनी हैं। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बीमा कंपनियां भी अब इस स्थिति का फायदा उठा रही हैं और वाहन खराब होने पर एथनॉल को आधार बनाकर क्लेम खारिज करने के बहाने तलाश लेती हैं। उन्होंने सरकार से तीखा सवाल किया कि वह चंद मुनाफाखोरों के हित के लिए आम जनता का शोषण क्यों कर रही है।