सारे Jewellers ले आये नई स्कीम, अब पुराना Gold बेचो नहीं, बदलो! मिलेगा पूरा फायदा

By नीरज कुमार दुबे | May 15, 2026

हाल ही में सोने के आयात शुल्क में बढ़ोतरी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोगों से सोने की खरीद कुछ समय के लिए टालने की अपील के बाद देश की प्रमुख आभूषण कंपनियां अब सोना पुनर्चक्रण योजनाओं यानि गोल्ड रि-साइक्लिंग स्कीम्स को तेजी से बढ़ावा दे रही हैं। इस पहल का उद्देश्य एक ओर घरेलू बाजार में सोने की मांग को संतुलित करना है, वहीं दूसरी ओर सोने के आयात पर निर्भरता कम कर देश को सीमा शुल्क भुगतान में राहत दिलाना भी है।

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मुथूट एक्जिम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कीयूर शाह के अनुसार सोना पुनर्चक्रण का मतलब ग्राहकों से पुराना सोना खरीदकर उसे शुद्ध करना और फिर दोबारा उद्योग में उपयोग के लिए उपलब्ध कराना है। उनका कहना है कि यदि भारतीय घरों में मौजूद कुल सोने का केवल एक प्रतिशत भी पुनर्चक्रित हो जाए तो देश का सोना आयात लगभग तीन सौ टन तक कम हो सकता है। यह भारत के कुल वार्षिक सोना आयात का लगभग चालीस प्रतिशत है।

हम आपको बता दें कि कंपनियों ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अलग अलग योजनाएं शुरू की हैं। कल्याण ज्वेलर्स ने ‘नेशन फर्स्ट गोल्ड फॉर इंडिया’ पहल के तहत पुराना सोना विनिमय योजना शुरू की है। इसके तहत ग्राहक अपने पुराने या अनुपयोगी गहनों को नए डिजाइन में बदलवा सकते हैं। वहीं मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स ने अपनी स्वर्ण मौद्रीकरण योजना में न्यूनतम जमा सीमा दस ग्राम से घटाकर केवल एक ग्राम कर दी है। कंपनी ग्राहकों को सोने के वजन या नकद दोनों रूपों में भुगतान का विकल्प दे रही है।

मुथूट एक्जिम के देशभर में सौ केंद्र हैं और कंपनी के अनुसार उसने अब तक करीब पांच टन पुराना सोना खरीदा है। चालू वित्त वर्ष में ही लगभग एक हजार किलोग्राम सोना पुनर्चक्रण के लिए जुटाया गया है। दूसरी ओर तनिष्क की ‘ओल्ड गोल्ड न्यू इंडिया’ मुहिम के अंतर्गत नौ कैरेट से बाइस कैरेट तक के सोने को स्वीकार किया जा रहा है। कंपनी किसी भी ज्वेलर का सोना लेने का दावा करती है, चाहे वह टूटा हुआ या छोटा आभूषण ही क्यों न हो।

देखा जाये तो ग्राहकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह रहता है कि पुराने गहनों का मूल्यांकन किस प्रकार किया जाता है। कंपनियों का कहना है कि अब पारंपरिक अंदाजे की बजाय वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है। कल्याण ज्वेलर्स के अनुसार सोने की शुद्धता जांचने के लिए कैरेट मीटर और सटीक वजन मशीनों का उपयोग किया जाता है। मुथूट एक्जिम ने बताया कि वह एक्स आर एफ तकनीक वाली मशीनों का प्रयोग करता है, जिससे केवल तीस सेकंड में यह पता चल जाता है कि गहनों में सोने, चांदी, तांबा, जस्ता या निकल की कितनी मात्रा है। वहीं एमएमटीसी पैंप ने कहा कि उसकी प्रक्रिया में जर्मन तकनीक आधारित आधुनिक मशीनों का उपयोग होता है, जिससे ग्राहकों के गहनों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचता।

हम आपको बता दें कि पुराने सोने के बदले मिलने वाली राशि बाजार भाव और शुद्धता पर निर्भर करती है। मुथूट एक्जिम प्रतिदिन भारतीय बुलियन और ज्वेलर्स एसोसिएशन के बाजार भाव के अनुसार मूल्य तय करता है। कुछ कंपनियां सेवा शुल्क भी वसूलती हैं। मुथूट एक्जिम सोने की कीमत का लगभग तीन प्रतिशत सेवा शुल्क लेता है, जबकि एमएमटीसी पैंप वस्तु एवं सेवा कर के साथ अन्य शुल्क भी लागू करता है। कल्याण ज्वेलर्स का कहना है कि पुराने सोने के विनिमय पर कर नहीं लगता, केवल नए गहनों की खरीद पर कर देय होता है। कंपनी ने दावा किया है कि दस ग्राम सोने पर ग्राहकों को लगभग पूरा मूल्य दिया जाता है और केवल मिश्रित धातु अलग करने का मामूली शुल्क लिया जाता है।

इसी बीच आभूषण उद्योग का विस्तार अब शॉपिंग मॉल संस्कृति को भी प्रभावित कर रहा है। नई दिल्ली समेत देश के प्रमुख शहरों में ज्वेलरी स्टोर अब बड़े मॉलों के प्रमुख आकर्षण बनते जा रहे हैं। चार वर्ष पहले जहां मॉल क्षेत्रफल का केवल एक प्रतिशत हिस्सा आभूषण दुकानों के पास था, वहीं अब यह बढ़कर लगभग दस प्रतिशत तक पहुंच गया है।

रियल एस्टेट सलाहकार कंपनियों के अनुसार संगठित खुदरा बाजार में आभूषण क्षेत्र की हिस्सेदारी वर्ष 2019 के दो प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2025 में आठ प्रतिशत तक पहुंच गई है। हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु और दिल्ली एनसीआर जैसे शहरों में बड़े आकार के ज्वेलरी शोरूम तेजी से खुल रहे हैं। उपभोक्ताओं का भरोसा संगठित और प्रतिष्ठित ब्रांडों की ओर बढ़ने से यह क्षेत्र मॉल संचालकों के लिए प्रमुख किरायेदार बन गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आभूषण खरीद अभी भी भरोसे और अनुभव पर आधारित है। लोग परिवार के साथ दुकान जाकर डिजाइन देखना और समझकर खरीदारी करना पसंद करते हैं। यही कारण है कि यह क्षेत्र ऑनलाइन बिक्री से अपेक्षाकृत कम प्रभावित हुआ है। तनिष्क, मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स, कल्याण ज्वेलर्स और कैरटलैन जैसे ब्रांड अब महानगरों के साथ छोटे शहरों में भी मॉलों के लिए भीड़ आकर्षित करने वाले प्रमुख केंद्र बन चुके हैं।

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