By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 15, 2026
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को आजमगढ़ में एक ही छत के नीचे स्कूल और कोचिंग केंद्र चलाए जाने की जांच का निर्देश देते हुए यह पता लगाने को कहा है कि कहीं ये संस्थान कोई ऐसा रैकेट तो नहीं चला रहे जिसमें विद्यार्थियों को उनकी जानकारी के बगैर एक “डमी स्कूल” में दाखिल दिखाया जा रहा है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने सरकार को उस स्कूल के प्रबंधन की जांच करने और शाहाना इंटरनेशनल स्कूल, जौनपुर के साथ उनके कथित संबंध पर एक रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया। इसी स्कूल में याचिकाकर्ता अबु हुजैफा को सीबीएसई प्रणाली के तहत कक्षा 11 का विद्यार्थी दिखाया गया है, जबकि उसने इस स्कूल में कभी भी दाखिला लेने की बात से इनकार किया है।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि हुजैफा कभी भी शाहाना इंटरनेशनल स्कूल का विद्यार्थी नहीं था। अपने जवाबी हलफनामा में उसने इस बात पर जोर दिया कि उसने ना तो कभी उस स्कूल में प्रवेश के लिए आवेदन किया, ना कभी कक्षा में शामिल हुआ और ना ही कभी कोई फीस भरी। याचिकाकर्ता ने कहा कि वह फडगुडिया में एक छात्रावास में रहता है और पांच जुलाई, 2025 से मार्च, 2026 तक एक अन्य संस्थान में मूल्यांकन के लिए हाजिर हुआ था।
शाहाना इंटरनेशनल स्कूल के रिकॉर्ड में उसकी प्रवेश की तिथि 12 अगस्त, 2025 दिखाई गई है, जबकि उस समय वह अन्य संस्थान में मूल्यांकन के लिए मौजूद था। रिकॉर्ड पर गौर करने के बाद अदालत ने सात अक्टूबर के अपने आदेश में कहा कि इन सामग्री से पता चलता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थी संभवतः एक संस्थान में कोचिंग ले रहे हों और बिना उनकी जानकारी के उन्हें दूसरे स्कूल में दाखिल दिखाया जा रहा हो। इस मामले में अगली सुनवाई दो नवंबर, 2026 को होगी।