By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 11, 2026
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पति की मृत्यु के बाद यदि कोई विधवा एक बच्चे को गोद लेती है, तो वह बच्चा मृतक पति का भी पुत्र माना जाएगा और उसे पति की संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार मिलेगा। न्यायमूर्ति चंद्र कुमार राय ने प्रयागराज के राम कृपाल द्वारा 1983 में दायर याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिका में चकबंदी अधिकारी के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें मोती रानी और उनके दिवंगत पति मुरलीधर के गोद लिए हुए पुत्र रामजी को मुरलीधर की संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार दिया गया था।
उच्च न्यायालय ने ‘सुभाष मिसिर’ मामले के एक अन्य निर्णय का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि विधवा द्वारा गोद लिया गया पुत्र, उसके मृतक पति का भी पुत्र माना जाएगा और विधवा की मृत्यु के बाद वह पति की संपत्ति का वैध उत्तराधिकारी होगा। अदालत ने इसी आधार पर राम कृपाल की याचिका खारिज कर दी।