इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- ‘तारीख पर तारीख’ आपराधिक न्याय व्यवस्था की पहचान नहीं बन सकती

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 18, 2026

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने देश की आपराधिक न्याय प्रणाली में होने वाली अत्यधिक देरी को लेकर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि 'तारीख पर तारीख' की संस्कृति हमारी न्याय व्यवस्था की पहचान नहीं होनी चाहिए। न्यायमूर्ति राजीव भारती ने यह बात बहराइच जिले के करीब 25 साल पुराने अपहरण के एक मामले में सुनवाई के दौरान कही। कोर्ट ने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले को दो दशक से अधिक समय तक लटकाए रखना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाली त्वरित और निष्पक्ष सुनवाई की गारंटी का सीधा उल्लंघन है।

निचली अदालत के कामकाज पर असंतोष व्यक्त करते हुए हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कई सालों से इस मामले की सुनवाई में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। अदालत ने माना कि इतनी लंबी देरी की वजह से कानूनी कार्यवाही अब केवल एक औपचारिकता मात्र बनकर रह गई है। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि न्याय को अनिश्चित काल के लिए लंबित नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि यह न्याय प्रणाली की गरिमा और नागरिक अधिकारों के खिलाफ है।

न्यायमूर्ति राजीव भारती ने अजय कुमार उर्फ चिंगी और राम चंद्र की अग्रिम जमानत अर्जी को मंजूर करते हुए उन्हें राहत प्रदान की है। अदालत ने आदेश दिया कि दोनों आरोपी दो सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण करें, जिसके बाद उन्हें कुछ निश्चित शर्तों के आधार पर अग्रिम जमानत पर रिहा कर दिया जाए। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश में की गई टिप्पणियां मामले के गुण-दोष पर फैसला करते समय निचली अदालत को प्रभावित नहीं करेंगी।

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