By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 04, 2026
लखनऊ, तीन अगस्त इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने प्रदेश के विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि जर्जर भवनों के साथ-साथ गैर-संरचनात्मक खतरे भी बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम हैं। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृज राज सिंह की पीठ गोमती रिवर बैंक रेजीडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि प्रदेश के करीब 4,000 विद्यालयों के ऊपर से हाईटेंशन बिजली की लाइनें गुजर रही हैं, जिससे विद्यार्थियों की सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है।
अदालत को बताया गया कि परिवहन विभाग के अनुसार 2,370 स्कूल वाहन चालकों में से 527 की मिशन भरोसा के तहत पुलिस सत्यापन रिपोर्ट प्रतिकूल पाई गई है। अदालत ने कहा कि वाहन चालकों की पृष्ठभूमि का सत्यापन अनिवार्य होना चाहिए और स्कूल प्रबंधन को इस संबंध में पूरी सतर्कता बरतनी होगी। लखनऊ पुलिस ने अदालत को बताया कि विद्यालयों के प्रवेश द्वारों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
अदालत ने अगली सुनवाई तक कैमरों की संख्या और अनुमानित लागत का ब्यौरा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अदालत को बताया गया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अंतिम चरण में है और इसे अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। पीठ ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगी।