दृष्टिबाधितों के लिए आरक्षित पदों को न भरने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब मांगा

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 28, 2026

लखनऊ, 27 जुलाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 13 साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए आरक्षित ‘बैकलॉग’ रिक्तियों को भरने के निर्देश देने वाले 2013 के आदेश का पालन करने में विफलता पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने ‘नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड, उत्तर प्रदेश’ द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए 24 जुलाई को यह आदेश पारित किया। अदालत ने राज्य सरकार को यह बताने का निर्देश दिया कि उसके 17 जुलाई, 2013 के फैसले में जारी निर्देशों को क्यों लागू नहीं किया गया और दृष्टिबाधित उम्मीदवारों के लिए आरक्षित ‘बैकलॉग’ रिक्तियां क्यों नहीं भरी गईं।

पीठ ने कहा कि 2013 के फैसले में राज्य सरकार को सरकारी विभागों, निगमों और स्थानीय निकायों में दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए एक प्रतिशत आरक्षण के तहत निर्धारित सभी ‘बैकलॉग’ रिक्तियों को छह महीने के भीतर भरने का निर्देश दिया गया था। आदेश के अनुसार, अदालत ने मुख्य सचिव को फैसले का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक निगरानी समिति गठित करने और अदालत के समक्ष एक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता ने कहा कि अनुपालन हलफनामा दाखिल नहीं करने के अलावा, राज्य ‘बैकलॉग’ रिक्तियों को भरने के लिए ठोस निर्देश को लागू करने में भी विफल रहा है।

वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि अदालत के आदेश का औपचारिक अनुपालन भी नहीं हुआ। इसके साथ ही ‘बैकलॉग’ रिक्तियों को भरने संबंधी मूल निर्देशों का भी पालन नहीं किया गया। इस पर अदालत ने राज्य सरकार को विशेष रूप से इस पहलू पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

प्रमुख खबरें

महाराष्ट्र: प्रेम संबंध पर शक में महिला की हत्या, शव कार में रखकर कोल्हापुर से ठाणे ले गया आरोपी

बिहार में प्रदर्शनकारी छात्रों पर एके-47 के कथित इस्तेमाल को लेकर अरविंद केजरीवाल ने भाजपा पर साधा निशाना

मणिपुर में अलग-अलग प्रतिबंधित संगठनों के चार उग्रवादी गिरफ्तार, उगाही गतिविधियों में थे संलिप्त

Delhi Police का बड़ा खुलासा, 20 July Protest में शामिल थे 989 Criminals, उनमें से 101 पर चल रहा है Murder, 61 पर Rape Case