UP में बढ़ते Child Marriage पर Allahabad High Court सख्त, DGP को दिए कड़े Action के निर्देश

By अभिनय आकाश | May 25, 2026

उत्तर प्रदेश में बाल विवाहों में हो रही वृद्धि को देखते हुए, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक को ऐसे विवाह संपन्न कराने वाले सभी व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता और डॉ. अजय कुमार-द्वितीय की पीठ ने 14 वर्षीय लड़की के कथित अपहरण और बाल विवाह के संबंध में दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार करते हुए ये निर्देश पारित किए। न्यायालय ने 13 मई को अपने आदेश में कहा चूंकि बाल विवाह निषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत ऐसे अवैध बाल विवाहों को संपन्न कराने वाले सभी व्यक्तियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश राज्य में बाल विवाह दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। अदालत ने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है जिसे देश से जड़ से खत्म किया जाना चाहिए, जो कि केवल एक वैधानिक लक्ष्य नहीं बल्कि एक संवैधानिक आवश्यकता है।

इसे भी पढ़ें: Bakrid से पहले CM Yogi के UP में सख्त निर्देश: खुले में न नमाज़, न कुर्बानी

बाल विवाह

एफआईआर के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसकी नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली लगभग 15 वर्षीय बेटी को एक व्यक्ति ने शादी के इरादे से घर से बहला-फुसलाकर ले गया।

एफआईआर में आगे आरोप लगाया गया कि आरोपी और उसके परिवार के सदस्य लड़की के गहने और नकदी लेकर घर से निकलने के बाद उसे छिपा रहे थे।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि लड़की ने स्वेच्छा से शादी की थी और अपनी मर्जी से आरोपी के साथ रह रही थी। यह भी तर्क दिया गया कि चूंकि शादी लड़की के माता-पिता की इच्छा के विरुद्ध हुई थी, इसलिए झूठी एफआईआर दर्ज की गई।

इस दलील का विरोध करते हुए, राज्य ने प्रस्तुत किया कि स्कूल के रिकॉर्ड के अनुसार एफआईआर दर्ज होने के समय लड़की की उम्र 14 वर्ष और सात महीने थी।

राज्य ने तर्क दिया कि आरोपी ने नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर उसके माता-पिता की कानूनी देखरेख से दूर ले जाकर उससे जबरन शादी करने का इरादा किया था।

इसे भी पढ़ें: तपती धरती, झुलसता जीवन: जनता के समक्ष हीटवेव की चुनौती

संज्ञेय अपराध

एफआईआर में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए न्यायालय ने माना कि संज्ञेय अपराध स्पष्ट रूप से सामने आए थे और जांच के दौरान पर्याप्त सबूत एकत्र किए गए थे। न्यायालय ने कहा कि कानून बचपन की रक्षा करता है, ताकि वह समझदारी से वयस्क बन सके। यह न्यायालय इस सुरक्षा को कमज़ोर नहीं होने देगा। न्यायालय ने आगे कहा कि जांच अधिकारियों ने कभी भी बालिका से विवाह करने वाले ऐसे आरोपियों और ऐसे अवैध विवाह के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ विवाह निषेध अधिनियम की धारा 10 और 11 नहीं लगाई।

प्रमुख खबरें

नॉर्वे के Coach का दावा तार से टकराई गेंद, FIFA ने Sensor Data से खारिज किया पूरा आरोप

England Cricket में Bazball युग का अंत, Test Team के कोच पद से Brendon McCullum की छुट्टी

Lords में Yastika Bhatia का ऐतिहासिक शतक, ऑनर्स बोर्ड पर नाम दर्ज कराने वाली पहली महिला क्रिकेटर

Sunil Mittal का बड़ा ऐलान, Airtel अब FinTech और Data Center में करेगी हज़ारों करोड़ का निवेश