By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 07, 2026
लखनऊ, सात अगस्त इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद अधिनियम, 1965 के भूमि अधिग्रहण प्रावधानों को सही ठहराया है। हालांकि अदालत ने निर्देश दिया कि जिन भू-स्वामियों की संपत्तियां इस कानून के तहत अधिग्रहित की जाएं, उन्हें 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत उपलब्ध मुआवजा और पुनर्वास सुविधाओं से कम लाभ नहीं मिलना चाहिए। अदालत ने अयोध्या में विकसित की जा रही तीन आवासीय योजनाओं को रद्द करने से भी यह कहते हुए इनकार किया कि इस चरण में उन्हें रद्द करने से एकीकृत विकास योजना बाधित होगी।
अदालत ने इस कानून की धारा 28, 31 और 32 को सही ठहराया। हालांकि अदालत ने कहा कि धारा 55 और इसकी अनुसूची को यदि बिना सुरक्षा उपायों के लागू किया जाता है तो इससे संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा जो कानून के समक्ष समानता की गारंटी देता है। अदालत ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास बोर्ड को 2013 के कानून के मुताबिक मुआवजा निर्धारित करने का निर्देश दिया।