Wrestlers Protest: महिला पहलवानों का आरोप, जांच समिति बृजभूषण के प्रति पक्षपाती थी

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jul 18, 2023

नयी दिल्ली। महिला पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के निवर्तमान प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच करने वाली जांच समिति की मंशा पर सवाल उठाए हैं। महिला पहलवानों ने मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा दायर आरोप पत्र के आधार पर आरोप लगाया है कि जांच समिति बृजभूषण के खिलाफ पक्षपाती थी। बृजभूषण को उनके और डब्ल्यूएफआई के सहायक सचिव विनोद तोमर के खिलाफ जारी समन के अनुपालन में मंगलवार को सुनवाई अदालत में पेश होना है। डब्ल्यूएफआई प्रमुख पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए केंद्र सरकार ने दिग्गज मुक्केबाज एम सी मैरी कॉम के नेतृत्व में छह सदस्यीय समिति का गठन किया था।

इस समिति ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने अलग-अलग बयान में आरोप लगाया कि जांच समिति बृजभूषण के प्रति पक्षपातपूर्ण नजर आती है, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक सांसद भी हैं। बृजभूषण के खिलाफ दायर 1,599 पन्नों के आरोप पत्र में 44 गवाहों के बयान के अलावा शिकायतकर्ताओं के छह बयान शामिल हैं, जो दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा-164 के तहत दर्ज किए गए थे। एक शिकायतकर्ता ने कहा, “जांच समिति के समक्ष अपना बयान देने के बाद मैं जब भी फेडरेशन कार्यालय गई, आरोपी ने मुझे घृणित और कामुक नजरों से देखा और गलत इशारे किए, जिससे मुझे असुरक्षित महसूस हुआ।”

उसने आरोप लगाया, “यहां तक कि जब मैं अपना बयान दे रही थी, तब भी वीडियो रिकॉर्डिंग बंद और शुरू की जा रही थी। मेरे अनुरोध के बावजूद समिति ने मुझे मेरे बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग की प्रति नहीं दी। मुझे आशंका है कि मेरा पूरा बयान दर्ज नहीं किया गया होगा और आरोपियों को बचाने के लिए इससे छेड़छाड़ भी की गई होगी।” एक अन्य शिकायकर्ता ने दावा किया कि उसे उसकी सहमति के बिना ऐसे मामलों की जांच के लिए डब्ल्यूएफआई यौन उत्पीड़न समिति का सदस्य बनाया गया था। उसने कहा कि सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों के पास आंतरिक शिकायत समिति होनी चाहिए। शिकायतकर्ता के मुताबिक, “मुझसे इस तरह की मंजूरी के बारे में सूचित करने के लिए कभी कोई औपचारिक संवाद नहीं किया गया, न ही भारतीय कुश्ती महासंघ की यौन उत्पीड़न समिति का हिस्सा बनने के लिए मेरी स्वीकृति के वास्ते मुझे कोई औपचारिक संवाद प्राप्त हुआ।’’

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उसने कहा, “आरोपी ने आरोपी नंबर दो और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के साथ साजिश करके जानबूझकर मेरी आवाज और उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों को दबाने के लिए ऐसा किया है। उन्होंने मेरी सहमति या सर्वसम्मति के बिना मुझे उक्त समिति का हिस्सा बना दिया और अब आरोप लगा रहे हैं कि समिति की सदस्य होने के बावजूद मैं खुद पर पीड़ित होने का झूठा आरोप लगा रही हूं।” इस शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि जांच समिति ने उसे (बयान की) रिकॉर्डिंग मांगने पर भी उपलब्ध नहीं कराई। उसने कहा, “मुझे संदेह था कि वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान मेरा बयान पूरी तरह से रिकॉर्ड नहीं किया गया होगा या आरोपी को बचाने के प्रयास में इसे बदल दिया गया होगा। इसलिए मैंने वीडियो रिकॉर्डिंग की एक प्रति देने का अनुरोध किया था। हालांकि, जांच समिति के सदस्यों ने मेरे अनुरोध को सीधे तौर पर ठुकरा दिया।

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