By अंकित सिंह | Feb 01, 2024
कथित भूमि घोटाला मामले में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ईडी की तरफ से गिरफ्तार कर लिया गया है। आज उन्हें कोर्ट में भी पेश किया गया। फिलहाल उन्हें एक दिन के न्यायिक हिरासत पर भेजा गया है। इन सब के बीच हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी पर राजनीति भी जबरदस्त तरीके से हो रही है। विपक्षी दलों की ओर से केंद्र सरकार पर आरोप लगाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी को आदिवासी समाज से भी जोड़ा जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि आदिवासी समाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। इसी कड़ी में अब भाजपा की ओर से पलटवार किया गया है। भाजपा की ओर से साफ तौर पर कहा गया है कि जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वह पूरी तरीके से बुनियाद है। केंद्र की मोदी सरकार आदिवासी समाज के बहुत इज्जत करती हैं।
भाजपा नेता ने कहा कि मोदी सरकार देश के आदिवासी समाज की बहुत इज्जत करती है। मोदी सरकार ने पहली बार आदिवासी समुदाय की महिला श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी को राष्ट्रपति बनाया। दलित समाज से आने वाले श्री रामनाथ कोविंद जी को भारत का राष्ट्रपति बनाया। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा म्यूजियम को स्थापित कर आदिवासी समाज को आगे लाने में मोदी सरकार की बहुत बड़ी भूमिका है। आदिवासी समाज के विकास के लिए विशेष योजनाएं भी चलाई हैं। उन्होंने बाताय कि हेमंत सोरेन के खिलाफ तीन मामले हैं- पहला- जमीन की लूट का, दूसरा- अवैध खनन का, तीसरा- कोयला खदानों में घोटाले का। इन तीनों में सिर्फ एक मामले में अभी पेशी हुई है।
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता हेमंत सोरेन के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई और मुख्यमंत्री पद से उनके इस्तीफे के बाद बुधवार को दावा किया कि केंद्रीय गैस एजेंसियां भारतीय जनता पार्टी की विपक्ष मिटाओ सेल बन चुकी हैं। राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट किया, ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग आदि अब सरकारी एजेंसियां नहीं रहीं, अब यह भाजपा की ‘विपक्ष मिटाओ सेल’ बन चुकी हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दावा किया कि जो भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नहीं जाएगा उसे जेल जाना पड़ेगा। उन्होंने सोरेन की गिरफ्तारी को भाजपा के आदिवासी विरोधी रुख का सबूत करार दिया। स्टालिन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी केंद्र की भाजपा सरकार के राजनीतिक प्रतिशोध का एक स्पष्ट प्रदर्शन है। किसी आदिवासी नेता को परेशान करने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल करना निम्न स्तर का कृत्य है।