By Ankit Jaiswal | Jan 04, 2026
वैश्विक राजनीति में तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच चीन ने वेनेजुएला को लेकर अमेरिका पर कड़ा रुख अपनाया है। बीजिंग से आई आधिकारिक प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और संवेदनशील बना दिया।
बता दें कि चीन के विदेश मंत्रालय ने रविवार, 4 जनवरी 2026 को जारी अपने बयान में कहा है कि अमेरिका को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को तुरंत रिहा करना चाहिए और इस पूरे मामले का समाधान बातचीत और कूटनीतिक संवाद के जरिए किया जाना चाहिए हैं। मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर जारी बयान में साफ तौर पर कहा है कि अमेरिका को न सिर्फ मादुरो दंपति की व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए, बल्कि उनकी जबरन कार्रवाई और निर्वासन को भी तुरंत रोकना चाहिए।
गौरतलब है कि चीन ने इस कदम को अंतरराष्ट्रीय कानून और स्थापित वैश्विक मानदंडों का उल्लंघन बताया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, चीनी विदेश मंत्रालय का कहना है कि किसी संप्रभु देश के निर्वाचित राष्ट्रपति के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई वैश्विक व्यवस्था के लिए खतरनाक मिसाल बन सकती है।
अपने आधिकारिक बयान में चीन ने अमेरिका से अपील की है कि वह वेनेजुएला की सरकार को गिराने की कोशिशें बंद करे और वहां के राजनीतिक संकट को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की दिशा में कदम उठाए हैं। चीन ने अमेरिकी कार्रवाई को सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन करार दिया है और इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया।
बता दें कि वेनेजुएला लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा है। इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका और चीन के आमने-सामने आने से यह मुद्दा अब केवल लैटिन अमेरिका तक सीमित न रहकर वैश्विक भू-राजनीतिक टकराव का हिस्सा बनता जा रहा है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस पर संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी तीखी बहस देखने को मिल सकती है, जो वैश्विक कूटनीति की दिशा को प्रभावित कर सकती है।