By अभिनय आकाश | Jan 19, 2026
पीएम मोदी के बारे में एक बात बड़ी प्रचलित है कि वह जब लाठी चलाते हैं तो ज्यादा आवाज नहीं होती और अब कुछ वैसा ही अमेरिका के साथ हुआ है। अमेरिका के ऊपर भारत ने एक ऐसी लाठी चलाई कि अब इसकी हल्कीफुल्की आवाज आना शुरू हो गई है। हुआ यूं है कि जब अमेरिका ने भारत के ऊपर टेरिफ लगाया, तो इसके बाद भारत ने भी एक काउंटर टेररिफ लगाया है और वह टेरिफ की वजह से जो अमेरिकन फार्मर्स हैं वह बिलबिलाए हुए हैं। जिसके बाद एक चिट्ठी सीधे वाइट हाउस में ट्रंप के पास पहुंचती है। जिसमें वह गिड़गिड़ा रहे हैं कि प्लीज आप पीएम मोदी से बात कीजिए। अमेरिकन फार्मर्स को आप बचाइए और भारत से आप रिक्वेस्ट करें कि वह हमें राहत दें। दरअसल आपको बता दें कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत से आने वाले उत्पादों पर 50% तक का टेरिफ लगाया तो भारत ने भी जवाब देने में देरी नहीं की। भारत ने अमेरिका से आयात होने वाली दालों और फलियों पर 30% टेरिफ लगाया।
जहां अमेरिकी सेनेटरों ने भारत द्वारा दालों पर लगाए गए 30% टैरिफ को हटाने की मांग की है। आपको बता दें सेनेटर अमेरिकी कांग्रेस यानी वहां के संसद में अपने राज्य के चुने हुए प्रतिनिधि होते हैं और इन्हीं चुने हुए प्रतिनिधियों ने अब भारत के द्वारा लगाए गए टैरिफ को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में भारत अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट में दलहन वाली फसलों के लिए अनुकूल प्रावधान शामिल करने की मांग की गई है। यानी कि सीनेटर अमेरिका को फायदा देने वाले प्रावधान लाने की अपील कर रहे हैं। इन सेनेटरों का कहना है कि भारत को अमेरिकी पीली मटर पर लगाया गया 30% का टैक्स हटाना चाहिए। चिट्ठी में आगे बताया गया कि नॉर्थ डकोटा और मॉनटाना अमेरिका में मटर और दूसरी दलहन फसलों के सबसे बड़े उत्पादक राज्य हैं। वहीं भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है जो वैश्विक खपत का करीब 27% हिस्सा अकेले इस्तेमाल करता है।
दूसरी मांग यह है कि अमेरिकी दलहन पर लगे टेरिफ को कम कराया जाए और तीसरी मांग यह है कि किसानों के लिए भारत का बाजार दोबारा खोला जाए। अब समझिए कि भारत के इस एक्शन के बारे में यानी कि भारत ने कैसे और क्या काम किया जिससे कि अमेरिका को इतना झटका लग रहा है और अब सीधे अमेरिकी सेनेटर्स ट्रंप को डायरेक्ट चिट्ठी लिख रहे हैं और यह कह रहे हैं कि आप प्लीज पीएम मोदी से बात कीजिए। दरअसल भारत में दालें सिर्फ व्यापार नहीं गरीब की थाली का आधार है। बीते सालों में घरेलू उत्पादन बढ़ा। एमएसपी पर खरीद हुई। किसानों को संरक्षण देना जरूरी था।