By अभिनय आकाश | May 08, 2026
जहां अमेरिका और ईरान के बीच भले ही सीजफायर लागू हो लेकिन जंग की आग एक बार फिर से भड़कते हुए दिखाई दे रही है। 7 मई को होर्मुज स्ट्रीट में कुछ ऐसा हुआ जिसने जंग किया को फिर से भड़का दिया है। ईरान ने अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाया तो जवाब में डोनाल्ड ट्रंप की सेना ने ईरान की बंदरगाहों पर जोरदार स्ट्राइक कर दी है और ईरान में भारी बमबारी अमेरिका के द्वारा की गई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंट कॉम के मुताबिक उनके तीन गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर यूएसएस राफेल पराल्टा और यूएसएस मसोन अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से गुजर रहे थे। इसी दौरान ईरान ने उकसाने वाली कारवाई करते हुए मिसाइलें, ड्रोन और छोटी नावें बेचकर हमला करने की कोशिश की। हालांकि अमेरिकी सेना ने इन सभी खतरों को हवा में ही नाकाम कर दिया और हमले के तुरंत बाद अमेरिका ने जवाबी कारवाई करते हुए अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने ईरान के काशम और बंदर अब्बास जैसे रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, तेहरान ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन अमेरिकी युद्धपोतों पर जवाबी हमला किया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने खुलासा किया कि ईरान द्वारा किए गए इस हमले में जहाज-रोधी बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन शामिल थे। यह हमला ईरान के जास्क में एक ईरानी तेल टैंकर पर अमेरिका द्वारा किए गए जवाबी हमले का हिस्सा था। ईरान ने दावा किया कि यह हमला युद्धविराम के उल्लंघन के परिणामस्वरूप उकसाया गया था और इससे अमेरिकी सेना और अमेरिकी युद्धपोतों को भारी नुकसान पहुंचा है। अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने बाद में पुष्टि की कि यूएसएस ट्रक्सटन, यूएसएस राफेल पेराल्टा और यूएसएस मेसन को ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों द्वारा निशाना बनाया गया था, लेकिन अमेरिकी युद्धपोत ने सफलतापूर्वक जवाबी हमला किया और आईआरजीसी के दावे के विपरीत अमेरिकी जहाजों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया।
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