Iran में बुरा फंसा अमेरिका, भारत से मांगी सबसे बड़ी मदद

By अभिनय आकाश | Mar 06, 2026

घमंड का सिर हमेशा नीचा होता है और आज यही कहावत दुनिया की सबसे बड़ी सुपर पावर अमेरिका पर बिल्कुल फिट बैठती दिखाई दे रही है। जिस अमेरिका ने कुछ ही समय पहले दुनिया को यह बताया था कि उसके पास अनलिमिटेड मिसाइलें हैं। वही अमेरिका अब एक ऐसी समस्या में फंस गया है जिनकी उसने शायद कल्पना ही नहीं की थी। और इस पूरी कहानी में सबसे दिलचस्प बात यह है कि अब अमेरिका की नजरें भारत की तरफ उठ गई है। अमेरिका की दिग्गज रक्षा कंपनी लॉकिड मार्टिन ने भारत की दो बड़ी डिफेंस कंपनियों टाटा एडवांस सिस्टम्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से संपर्क साधा है। सबसे पहले आपको याद दिला दें कि डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान जिसमें उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका के पास अनलिमिटेड मिसाइलें हैं। लेकिन अब यह दावा धीरे-धीरे हवा होता हुआ दिखाई दे रहा है। सितंबर 2025 में अमेरिकी सेना ने लॉकिट मार्टिन के साथ एक बड़ा समझौता किया। यह समझौता करीब 9.8 बिलियन का था। इस समझौते के तहत अमेरिकी सेना को 1970 पैक थ्री इंटरसेप्ट मिसाइलें मिलने वाली थी। 

इसे भी पढ़ें: US Israel Iran War: 120 सेकेंड...एक साथ मारे जाते US के 10000 फौजी?

यानी साफ है कि अगर सैकड़ों या हजारों ड्रोन और मिसाइलों के हमले होते हैं तो हजार 20 हजार इंटरसेप्टर मिसाइलें बहुत जल्दी खत्म हो सकती है। यहीं से अमेरिका की असली परेशानी शुरू होती है। दूसरी तरफ ईरान की रणनीति बिल्कुल स्पष्ट है। ईरान बेहद सस्ते लेकिन बड़ी संख्या में बनने वाले ड्रोन और मिसाइलों पर काम कर रहा है। जबकि अमेरिकी इंटरसेप्टर मिसाइलें बेहद महंगी होती है। एक इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत लाखों डॉलर तक हो सकती है। यानी अगर दुश्मन सस्ते ड्रोन और मिसाइलों की बाढ़ ला दे तो उन्हें रोकना बेहद महंगा और मुश्किल हो जाता है और यही स्थिति आज अमेरिका के सामने खड़ी हो गई है। अब यहां एक और दिलचस्प मोड़ आता है। अमेरिकी रक्षा कंपनी लॉकिड मार्टिन इस समय उत्पादन संकट का सामना कर रही है। इंटरसेप्टर मिसाइलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्हें बड़ी मात्रा में एलॉयज और कंपोजिट मटेरियल की जरूरत है और यही वजह है कि उन्होंने भारत की कंपनियों से संपर्क साधा। 

इसे भी पढ़ें: लाइन पर आ रहा है अमेरिका! भारत के साथ खराब हुए रिश्तों पर लगा रहा है 'तेल' का मरहम, रूस बना 'बाम'

भारत की टाटा एडवांस सिस्टम्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड को अमेरिका ने अपनी सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए संपर्क साधा। असल में मिसाइल बनाने की प्रक्रिया में सबसे पहले एयर फ्रेम तैयार किया जाता है। एयर फ्रेम बनने के बाद ही उसमें सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक और विस्फोटक सिस्टम लगाए जाते हैं। अगर एयर फ्रेम नहीं बनेंगे तो मिसाइल का उत्पादन ही रुक जाएगा और यही वह क्षेत्र है जहां भारत की कंपनियां मजबूत मानी जाती है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती है। इस संकट के पीछे एक और बड़ा कारण है यूरोप की नीति। दरअसल हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने स्पेन को लेकर कड़ा बयान दिया था। उन्होंने स्पेन को नाटो से बाहर निकालने तक की धमकी दे दी थी। इतना ही नहीं स्पेन के साथ व्यापार बंद करने की भी बात कही गई थी। लेकिन शायद ट्रंप ने यह नहीं सोचा था कि अमेरिकी मिसाइल उद्योग में स्पेन और यूरोप के कई देशों का भी योगदान है।

प्रमुख खबरें

Bengaluru की चिलचिलाती धूप में मिली ठंडी राहत, Ice Cream मिलते ही खिल उठे मजदूरों के चेहरे

IPL 2026 में Vaibhav Suryavanshi का तूफानी शतक, फिर Injury ने बढ़ाई सनराइजर्स की टेंशन

White House Dinner में Security में बड़ी चूक, हथियार लेकर घुसा शख्स, Washington में हड़कंप

PM Modi का Mamata Banerjee पर सीधा वार, मां, माटी, मानुष नारे को बताया सबसे बड़ा धोखा