अमेरिका ने टॉयलेट पेपर से भी बदतर हमारा...खुलासे ने उड़ाए होश!

By अभिनय आकाश | Feb 12, 2026

आज पाकिस्तान में टॉयलेट पेपर वायरल है। सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से यह ट्रेंड कर रहा है। दरअसल पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में टॉयलेट पेपर को लेकर के मिसालें दी गई हैं। पाकिस्तान की तुलना टॉयलेट पेपर से की गई है और वो भी पाकिस्तानी हुकूमत के एक नुमाइंदे के जरिए। आखिर क्यों और कैसे? आप खुद देखिए। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में खड़े होकर शहबाज सरकार के नुमाइंदे और मुल्ला मुनीर के तोते यानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कुछ ऐसा खुलासा किया जिसे सुनने के बाद पूरी दुनिया में पाकिस्तान की थू थू होने लगी क्योंकि ख्वाजा आसिफ ने दशकों से चलते आ रहे अमेरिका पाकिस्तान के रिश्ते पर यह दावा किया कि अमेरिका के लिए पाकिस्तान टॉयलेट पेपर की तरह है जिसका इस्तेमाल वो गंदगी साफ करने के लिए करता है और फिर इस्तेमाल होने के बाद कूड़ेदान में फेंक देता है।  इससे ज्यादा बेइज्जती और शर्म की बात क्या हो सकती है जब किसी मुल्क का नुमाइंदा ही अपने देश को टॉयलेट पेपर बता रहा हो।

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रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में जो जंग लड़ी थी वो धर्म के लिए नहीं अमेरिका के लिए थी।  1947 में पाकिस्तान ने अपने गठन के साथ ही भारत को अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी मान लिया था। विदेश नीति से लेकर डिफेंस पॉलिसी तक सब कुछ उसी हिसाब से लिखा जाने लगा था क्योंकि उसको कश्मीर पे हक चाहिए था। उसको हथियाना था। इसके लिए पाकिस्तान ने अमेरिका को एक बड़े भाई की तरह देखा जो उसे हथियार से लेकर पैसे तक सब दे सकता था। लिहाजा पाकिस्तान ने सुरक्षा और सेना के मामलों में अमेरिका का साथ पकड़ लिया। अमेरिका को पाकिस्तान में एशिया का वो साथी दिखा जिसका इस्तेमाल सोवियत संघ को काउंटर करने के लिए किया जा सकता था। शुरुआत 1956 में हुई। पाकिस्तान ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए को पेशावर में अपना यू टू जासूसी बेस चलाने की बनाने की इजाजत दे दी ताकि वहां से सोवियत संघ की हरकतों पे नजर रखी जा सके। 

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वियतनाम और ईरान में मात खाने के बाद अमेरिका रूस को मजा चखाना चाहता था। इसके लिए जरिया बना पाकिस्तान। पाकिस्तान की लोकेशन ऐसी है कि वो साउथ एशिया, सेंट्रल एशिया और मिडिल ईस्ट के बीच पड़ता है। इसलिए अमेरिका ने उसे एक तरह से बेस की तरह इस्तेमाल किया और उस समय अफगानिस्तान में जो लड़ाके सोवियत सेना के खिलाफ लड़ रहे थे उन्हें फेनिंग, पनाह और हथियार पहुंचाने में पाकिस्तान की खुफ़िया एजेंसी आईएसआई ने मदद भी की। बदले में पाकिस्तान को अरबों डॉलर की मदद और हथियार मिले। 

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