चीनी सामान के बहिष्कार की गूंज के बीच व्यापारी संगठन ने कहा-पड़ोसी का माल सस्ता नहीं होता

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 28, 2020

नयी दिल्ली। लद्दाख की गलवान घाटी में चीन की हमलावर हरकतों के बीच भारत में वहां के माल के बहिष्कार की गूंज के बीच देश के खुदरा व्यापारियों के प्रमुख संगठन कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल का मानना है कि यह भ्रम है कि चीन का सामान सस्ता होता है। ‘चीनी माल के बहिष्कार-अभियान में अग्रणी भूमिका निभा रहे खंडेलवाल ने ‘भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘तैयार माल को देखें तो 80 प्रतिशत उत्पाद ऐसे हैं, जिनमें भारत और चीन के सामान का दाम लगभग समान है। भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। चीन के उत्पाद ‘यूज एंड थ्रो’ वाले होते है। हमारे उत्पादों के साथ ऐसा नहीं है। इसके अलावा भारतीय सामान के साथ गारंटी भी होती है।’

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भारत में श्रम सस्ता है, जमीन उपलब्ध है, उपभोग के लिए बड़ी आबादी है। अगर सब मिलकर चलें, तो कोई वजह नहीं कि हम अगले चार-पांच साल में चीन से आयात पूरी तरह समाप्त करने में सफल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि चीनी सामान के बहिष्कार का अभियान कई साल से चल रहा है। यहीं वजह है कि अब होली, दिवाली जैसे भारतीय त्योहारों पर व्यापारियों ने चीन से आयात काफी कम कर दिया है। उन्होंने कहा कि चीन मुख्य रूप से तैयार माल, कच्चे माल, कलपुर्जों तथा प्रौद्योगिकी उत्पादों का निर्यात भारत को करता है। यदि हम सिर्फ तैयार माल मसलन फुटवियर, चमड़े का बैग या फिर किचन आदि का सामान ही चीन से मंगाना बंद कर दें, तो चीन पर हमारी निर्भरता 20 प्रतिशत घट जाएगी। उन्होंने कहा कि ताइवान, वियतनाम, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी और यहां तक कि आस्ट्रेलिया से भी हम आयात बढ़ाकर चीन को जवाब दे सकते हैं। खंडेलवाल कहते हैं कि चीन के पास कोई रॉकेट साइंस नहीं है। चीन ने सिर्फ सस्ते के नाम पर भारतीय बाजार में कब्जा किया है। उपभोक्ताओं के व्यवहार से उसने जाना कि सस्ते उत्पादों के जरिये वह भारतीय बाजार पर कब्जा कर सकता है। लेकिन अब समय बदल रहा है। लोग भी चीन का सामान नहीं खरीदना चाहते, व्यापारी भी बेचना नहीं चाहते।

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