Global Tension के बीच SBI का दावा, पटरी से नहीं उतरेगी Indian Economy की रफ़्तार

By Ankit Jaiswal | May 11, 2026

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ती दिखाई दे रही हैं। भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई की हालिया रिसर्च रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी विकास दर 6.6 प्रतिशत रह सकती हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार घरेलू खपत, मजबूत बैंकिंग व्यवस्था और आर्थिक गतिविधियों में तेजी देश की विकास दर को सहारा दे रही है।

एसबीआई के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खपत मजबूत बनी हुई हैं। कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों से मिल रहे सकारात्मक संकेतों का असर बाजार में साफ दिखाई दे रहा हैं। इसके अलावा सरकार की तरफ से दिए गए राजकोषीय प्रोत्साहन के कारण शहरी क्षेत्रों में भी मांग बढ़ी हैं। त्योहारी सीजन के बाद से शहरी खपत में लगातार सुधार देखा जा रहा हैं, जिससे आर्थिक विकास को मजबूती मिल रही है।

बता दें कि बढ़ती मांग का असर बैंकिंग क्षेत्र पर भी दिखाई दिया हैं। अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 16.1 प्रतिशत तक पहुंच गई हैं, जबकि इससे पिछले वर्ष यह 11 प्रतिशत थी। कुल ऋण वृद्धि 29.5 लाख करोड़ रुपये रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में भी ऋण वितरण मजबूत रह सकता हैं, हालांकि दूसरी छमाही में आधार प्रभाव के चलते इसमें थोड़ी नरमी देखने को मिल सकती है।

रिपोर्ट में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर भी अहम आकलन किया गया हैं। एसबीआई के अर्थशास्त्रियों के अनुसार अगर कच्चे तेल की कीमत में प्रति बैरल 10 डॉलर की बढ़ोतरी होती हैं, तो भारत का चालू खाता घाटा 35 आधार अंक तक बढ़ सकता हैं। इसके साथ ही महंगाई दर में 35 से 40 आधार अंक की वृद्धि और जीडीपी में 20 से 25 आधार अंक की कमी आ सकती हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार मई महीने में कच्चे तेल की कीमतें करीब 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। रिपोर्ट में आगे अनुमान जताया गया है कि आने वाले समय में कच्चे तेल का औसत भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब रह सकता हैं। इसी आधार पर वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.6 प्रतिशत विकास दर का अनुमान लगाया गया है।

गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के बावजूद भारत की घरेलू मांग और बैंकिंग व्यवस्था अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही हैं। जानकारों का मानना है कि अगर ग्रामीण और शहरी खपत इसी तरह बनी रहती हैं, तो भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रख सकता है।

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