Iran युद्ध के बीच समेट लिया बोरिया-बिस्तर, इस मुस्लिम देश से भागी US की सेना?

By अभिनय आकाश | Apr 18, 2026

ईरान ने अमेरिका के साथ जंग में जो जख्म दिए वो अब उसकी वैश्विक साख पर भी धब्बा बनते जा रहे हैं। ईरान ने जंग में अरब देशों में स्थित अमेरिकी बेस को भी करीब-करीब खत्म कर दिया। लेकिन इस बीच मिडिल ईस्ट में अमेरिका को एक और बड़ा झटका लगा है। एक ऐसा झटका जो सिर्फ सैन्य नहीं बल्कि रणनीतिक और राजनीतिक दोनों हैं। सीरिया के हसाका प्रांत में स्थित कसराक एयरबेस से अमेरिका ने अपनी आखिरी टुकड़ी भी हटा ली है। भारी सैन्य काफिले के साथ सैनिक और उपकरण बेस से बाहर निकल गए। जाते वक्त उन हथियारों और तकनीकी संसाधनों को भी नष्ट कर दिया गया जिन्हें साथ ले जाना संभव नहीं दिखा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसे सुनियोजित फैसला बताया। लेकिन असली सवाल यही है कि आखिर अमेरिका को इस मुकाम तक पहुंचने पर मजबूर किसने किया?

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दरअसल यह सिर्फ एक बेस खाली करने की कहानी नहीं है बल्कि मिडिल ईस्ट में बदलते पावर बैलेंस की कहानी है। सीरिया ने इस कदम को अपनी बड़ी जीत के तौर पर दिखाया और साफ कहा है कि उसके खोए हुए इलाकों पर फिर से नियंत्रण मिलना उसकी संप्रभुता की वापसी है। यह वापसी सीरिया सरकार और कुर्द लड़ाकों यानी एसडीएफ के बीच हुए समझौते के बाद संभव हुई। यानी जिस जमीन पर सालों तक अमेरिका की मौजूदगी रही वहां अब स्थानीय और क्षेत्रीय ताकतें हावी होती दिख रही हैं। अगर इस पूरे घटनाक्रम को ईरान अमेरिका तनाव के संदर्भ में देखें तो तस्वीर और भी दिलचस्प हो जाती है। एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप के लगातार ईरान पर दबाव बनाने की बातें और दावा करना कि ईरान के साथ ढील करीब है। 

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वहीं ईरान इन दावों को सिरे से खारिज कर रहा है। ऐसे वक्त में अमेरिका का सीरिया से पीछे हटना इस बात का संकेत दे रहा है। वाशिंगटन अपनी रणनीति बदल चुका है। अमेरिका लंबे समय से आईिस के खिलाफ ऑपरेशन के नाम पर सीरिया में मौजूद था और एसडीएफ के साथ मिलकर काम कर रहा था। लेकिन अब करीब 5700 आईिस और आतंकियों को सीरिया से इराक की जेलों में शिफ्ट किया जा चुका है। यानी अमेरिका यह संदेश दे रहा है कि उसका मुख्य मिशन अब करीब-करीब समाप्त हो गया और ग्राउंड पर भारी सैन्य मौजूदगी की जरूरत कम हो गई। सच्चाई यह भी है कि सीरिया में रूस और ईरान पहले से मजबूत स्थिति में है। ऐसे में अमेरिका का पीछे हटना इन ताकतों के लिए और ज्यादा स्पेस बनाता है? सवाल यह उठता है क्या अमेरिका यह स्पेस जानबूझकर दे रहा है या फिर हालात ने उसे ऐसा करने पर मजबूर कर दिया। कसरा एयरबेस से अमेरिकी सेना की विदाई के साथ ही एक दौर खत्म हो गया। लेकिन मिडिल ईस्ट की राजनीति में कोई भी खाली जगह ज्यादा देर तक नहीं रह पाती। वहां तुरंत कोई ना कोई ताकत कब्जा कर लेती है। 

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