By नीरज कुमार दुबे | May 21, 2026
भाजपा को चुनौती देने के लिए बनी कॉकरोच जनता पार्टी के उदय के बीच चुनाव विश्लेषक और एक्सिस माई इंडिया के प्रमुख प्रदीप गुप्ता ने एक बड़ी भविष्यवाणी कर दी है। उनका कहना है कि वर्ष 2014 से शुरू हुआ भाजपा का राजनीतिक प्रभुत्व आने वाले कम से कम बीस वर्षों तक कायम रह सकता है। प्रदीप गुप्ता के अनुसार जब तक भाजपा का शासन प्रदर्शन कमजोर नहीं होगा और जनता को विकास तथा सुशासन का अनुभव मिलता रहेगा, तब तक विपक्ष के लिए सत्ता तक पहुंचना बेहद कठिन बना रहेगा।
प्रदीप गुप्ता ने कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को जनता से भारी जनादेश मिला है, इसलिए लोगों की अपेक्षाएं भी काफी बढ़ गई हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब भाजपा को साधारण नहीं बल्कि अत्यंत प्रभावी प्रदर्शन करना होगा। यदि सरकार का कामकाज मजबूत बना रहता है और जनता को विकास तथा सुशासन का अनुभव होता रहता है, तो भाजपा लगातार चुनाव जीतती रहेगी और विपक्ष को हार का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने कांग्रेस की स्थिति पर भी टिप्पणी की। प्रदीप गुप्ता के अनुसार कांग्रेस आज भी अपने अतीत की छवि और कुप्रबंधन के बोझ से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाई है। उनका कहना था कि यदि वर्ष 2029 तक भी कांग्रेस सत्ता से बाहर रहती है, तो यह लगभग पंद्रह वर्षों का अंतराल होगा। उनके अनुसार देशभर में जनता का भरोसा दोबारा हासिल करने में कांग्रेस को कम से कम पांच वर्ष और लग सकते हैं।
हालांकि प्रदीप गुप्ता ने यह भी माना कि राजनीतिक ऊंचाई पर पहुंचने के बाद चुनौतियां भी बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई दल बहुत ऊंचाई पर पहुंच जाता है, तो जनता की अपेक्षाएं अत्यधिक बढ़ जाती हैं और बाद में गिरावट की संभावना भी बनी रहती है। भाजपा भी अब उसी चरण में पहुंच चुकी है जहां उससे हर मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।
हम आपको बता दें कि प्रदीप गुप्ता और उनकी संस्था एक्सिस माई इंडिया को देश की प्रमुख चुनाव सर्वेक्षण एजेंसियों में गिना जाता है। संस्था का दावा है कि उसने वर्ष 2013 के बाद हुए पैंसठ में से 61 चुनावों के परिणामों का सही अनुमान लगाया है। इस आधार पर उनकी सफलता दर लगभग 93 प्रतिशत बताई जाती है। कई समाचार माध्यम उनकी चुनाव बाद सर्वेक्षणों की सटीकता को 90 से 95 प्रतिशत तक मानते हैं।
हम आपको बता दें कि एक्सिस माई इंडिया को विशेष पहचान वर्ष 2014 और वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में मिली, जब उसके सर्वेक्षण काफी हद तक वास्तविक परिणामों के करीब साबित हुए। इसके अलावा वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों तथा इस साल के तमिलनाडु चुनावों में भी संस्था के अनुमान लगभग सटीक साबित हुए। इन सफलताओं के कारण प्रदीप गुप्ता को देश के सबसे विश्वसनीय चुनाव विश्लेषकों में गिना जाने लगा है।
लेकिन इस संस्था को हाल के वर्षों में कुछ चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को भारी बहुमत मिलने का अनुमान लगाया था। सर्वेक्षण में गठबंधन को 361 से 401 सीटें मिलने की संभावना जताई गई थी, लेकिन वास्तविक परिणाम इससे काफी अलग रहे और भाजपा अपने बलबूते स्पष्ट बहुमत से पीछे रह गयी। इस अंतर ने चुनावी सर्वेक्षणों की विश्वसनीयता और पद्धति पर बहस को फिर से तेज कर दिया था।
इसके अलावा प्रदीप गुप्ता की सर्वेक्षण पद्धति को कुछ राजनीतिक रूप से अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। उदाहरण के तौर पर हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान संस्था ने एग्जिट पोल के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए। इसके पीछे कारण यह बताया गया कि वहां मतदाताओं की ओर से पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं मिल रही थी और कई लोग अपनी राजनीतिक पसंद खुलकर बताने से बच रहे थे।
इन सबके बीच प्रदीप गुप्ता का मानना है कि भारतीय राजनीति फिलहाल एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहां भाजपा की स्थिति मजबूत बनी हुई है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह संकेत भी दिया कि राजनीति में कोई भी स्थिति स्थायी नहीं होती। जनता की अपेक्षाएं, शासन का प्रदर्शन और विपक्ष की रणनीति आने वाले वर्षों में देश की राजनीति की दिशा तय करेगी।
बहरहाल, भले ही कॉकरोच जनता पार्टी बनाकर कुछ लोग सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर और सब्सक्राइबर के दम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देने के बड़े बड़े दावे कर रहे हों, लेकिन असली ताकत आखिर जनता के वोट में ही दिखाई देती है। देश की 140 करोड़ जनता आज भी मोदी के नेतृत्व, उनके वादों और सरकार के कामकाज पर भरोसा जता रही है, तभी हर छोटे-बड़े चुनाव में भाजपा और एनडीए को लगातार जीत मिल रही है। हाल के वर्षों में कई ऐसे चेहरे भी सामने आए जिनके सोशल मीडिया पर करोड़ों फॉलोअर थे, लेकिन जब वे चुनाव मैदान में उतरे तो अपनी जमानत तक नहीं बचा सके। इसलिए कॉकरोच जनता पार्टी बनाने वालों, उनके समर्थकों और उनके फॉलोवरों को समझना होगा कि लोकतंत्र में जीत सर्वाधिक सोशल मीडिया रीच रखने वाले नेता की नहीं बल्कि जनता के मन तक रीच रखने वाले नेता की होती है।