Detect और Deport Policy लाई Suvendu Adhikari सरकार, बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से बाहर खदेड़ने के लिए BSF को सौंपेगी

By नीरज कुमार दुबे | May 21, 2026

पश्चिम बंगाल में नई सरकार के सत्ता संभालते ही जिस निर्णायक और कठोर कार्रवाई की शुरुआत हुई है, उसने साफ कर दिया है कि अब सीमा पार से होने वाली घुसपैठ, तस्करी और अवैध गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जिस आक्रामक अंदाज में “पता लगाओ, हटाओ और निर्वासित करो” नीति लागू करने की घोषणा की है, उसने पूरे देश में यह संदेश दे दिया है कि अब घुसपैठियों की खैर नहीं है।

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मुख्यमंत्री ने साफ किया कि नागरिकता संशोधन अधिनियम यानि सीएए के तहत आने वाले समुदायों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के वे लोग जो धार्मिक उत्पीड़न के कारण बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भारत आए हैं, उन्हें कानून के तहत सुरक्षा दी जाएगी। लेकिन जो लोग इस दायरे में नहीं आते, उन्हें घुसपैठिया माना जाएगा और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। राज्य पुलिस ऐसे लोगों को हिरासत में लेकर सीधे बीएसएफ को सौंप देगी। इसके बाद बीएसएफ, बांग्लादेश सीमा बल के साथ समन्वय कर निर्वासन की प्रक्रिया पूरी करेगी।

देखा जाये तो शुभेंदु अधिकारी का यह फैसला बंगाल की सुरक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन माना जा रहा है। वर्षों से खुली सीमाओं के कारण सीमावर्ती जिलों में घुसपैठ, मवेशी तस्करी, अवैध कारोबार और अपराध लगातार बढ़ते रहे। स्थानीय लोग भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर थे। लेकिन अब नई सरकार ने साफ कर दिया है कि सीमाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए 27 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में बाड़ लगाने हेतु भूमि बीएसएफ को सौंपने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में सीमा सुरक्षा के लिए बड़े स्तर पर आधारभूत ढांचा तैयार किया जाएगा। देखा जाए तो शुभेन्दु सरकार ने पहली ही कैबिनेट बैठक में इस संबंध में फैसला लेकर यह साबित कर दिया कि वह केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि जमीन पर कार्रवाई करने में विश्वास रखती है।

जानकारी के अनुसार, पांच जिलों में फैली 43 एकड़ खरीदी गई भूमि तथा लगभग 31.9 एकड़ निहित भूमि के स्वीकृति आदेश बीएसएफ को सौंपे गए हैं। बीएसएफ महानिदेशक प्रवीण कुमार ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार और बीएसएफ के बीच अब बेहतर समन्वय दिखाई दे रहा है। यह बदलाव सीमा सुरक्षा को और मजबूत करेगा।

हम आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल की सीमा बांग्लादेश के साथ लगभग 2217 किलोमीटर लंबी है। इसमें करीब 1600 किलोमीटर क्षेत्र में पहले ही बाड़ लग चुकी है, लेकिन लगभग 600 किलोमीटर हिस्सा अब तक खुला पड़ा था। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने राजनीतिक कारणों और तुष्टीकरण की नीति के चलते लगभग 555 किलोमीटर क्षेत्र में बाड़ लगाने के लिए भूमि उपलब्ध नहीं कराई। इसी का परिणाम था कि घुसपैठ और तस्करी जैसी समस्याएं लगातार बढ़ती रहीं।

उधर, उत्तर बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों ने नई सरकार के फैसले का जोरदार स्वागत किया है। जलपाईगुड़ी समेत कई क्षेत्रों में वर्षों से लोग खुले बॉर्डर की वजह से भय में जीवन बिता रहे थे। रात के समय घर लौटना तक मुश्किल हो जाता था। कई गांवों के लोगों को अपने ही घर पहुंचने के लिए बीएसएफ चौकियों से गुजरना पड़ता था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सीमा पर कांटेदार तार लगने से न केवल सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि उनका सामान्य जीवन भी आसान होगा।

स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी माना है कि पिछली सरकार के समय भूमि हस्तांतरण नहीं होने के कारण सीमा पर बाड़ लगाने का काम वर्षों तक अटका रहा। अब नई सरकार तेजी से सभी भूमि संबंधी समस्याओं का समाधान कर रही है। जलपाईगुड़ी प्रशासन ने अगले 45 दिनों के भीतर सभी लंबित मामलों को निपटाने का लक्ष्य तय किया है।

इसके अलावा, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घुसपैठ को केवल सीमा का मुद्दा नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, जबरन धर्मांतरण, अपराध और कई अन्य मामलों में पकड़े गए लोगों में बड़ी संख्या बांग्लादेशी घुसपैठियों की होती है। इसलिए अब किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

बहरहाल, यह स्पष्ट है कि शुभेंदु अधिकारी सरकार ने सत्ता में आते ही जिस दृढ़ इच्छाशक्ति और निर्णायक नेतृत्व का परिचय दिया है, उसने बंगाल की राजनीति और प्रशासन दोनों की दिशा बदल दी है। वर्षों तक वोट बैंक की राजनीति के कारण जिन मुद्दों को दबाया गया, उन पर अब खुलकर कार्रवाई हो रही है। सीमा सुरक्षा, घुसपैठ रोकने और आम नागरिकों को सुरक्षित वातावरण देने की दिशा में यह कदम ऐतिहासिक माना जा रहा है। बंगाल की जनता को अब भरोसा होने लगा है कि राज्य की सीमाएं सुरक्षित होंगी और घुसपैठियों के लिए अब कोई जगह नहीं बचेगी।

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