By अभिनय आकाश | Jul 22, 2025
गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनके आवास पर मुलाकात की और सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस मुलाकात में न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है, जिनके घर से इस साल की शुरुआत में जले हुए नोट मिले थे। इससे पहले सोमवार को 152 सांसदों द्वारा अध्यक्ष बिरला को हस्ताक्षरित ज्ञापन सौंपे जाने के बाद न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू हो गई। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अपने आवास पर बेहिसाब नकदी मिलने के बाद कदाचार के आरोपों के चलते पद से हटाए जाने का सामना कर रहे हैं। संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 के तहत दायर इस प्रस्ताव को भाजपा, कांग्रेस, टीडीपी, जेडी(यू), सीपीआई(एम) और अन्य दलों सहित विभिन्न दलों के सांसदों का समर्थन प्राप्त हुआ। हस्ताक्षरकर्ताओं में सांसद अनुराग ठाकुर, रविशंकर प्रसाद, राहुल गांधी, राजीव प्रताप रूडी, सुप्रिया सुले, केसी वेणुगोपाल और पीपी चौधरी शामिल हैं।
न्यायमूर्ति वर्मा 14 मार्च से सुर्खियों में हैं, जब एक आग लगने की घटना के बाद अग्निशमन दल और पुलिस उनके सरकारी आवास पर पहुँची थी। इसके बाद, वहाँ भारी मात्रा में अधजली नकदी बरामद हुई थी। उस समय, न्यायमूर्ति वर्मा दिल्ली उच्च न्यायालय में कार्यरत थे और बाद में उनका तबादला इलाहाबाद उच्च न्यायालय में कर दिया गया था। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त एक जाँच पैनल ने 10 दिनों तक इस घटना की जाँच की। पैनल ने 55 गवाहों से पूछताछ की और आग लगने वाली जगह का निरीक्षण किया, जो कथित तौर पर 14 मार्च की रात लगभग 11.35 बजे लगी थी। इसकी रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया कि न्यायमूर्ति वर्मा और उनके परिवार का उस स्टोर रूम पर गुप्त या सक्रिय नियंत्रण था जहाँ नकदी मिली थी, जिससे यह साबित हुआ कि उनका कदाचार इतना गंभीर था कि उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए।