घुसपैठियों को चुन चुन कर बाहर खदेड़ेंगे Amit Shah, देशव्यापी रणनीति बनाने के लिए बुलाई सभी राज्यों के DGP की बैठक

By नीरज कुमार दुबे | Jun 30, 2026

देश की आंतरिक सुरक्षा, जनसंख्या संतुलन और कानून व्यवस्था के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौतियों में अब अवैध घुसपैठ का मुद्दा निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। केंद्र की मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि अब घुसपैठियों और उन्हें संरक्षण देने वाले पूरे तंत्र के खिलाफ राष्ट्रव्यापी और समन्वित अभियान चलाया जाएगा। इसी दिशा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नौ जुलाई को नई दिल्ली में सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। यह बैठक देश की सुरक्षा को लेकर मोदी सरकार की कठोर और स्पष्ट नीति का प्रतीक मानी जा रही है।

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सरकारी सूत्रों के अनुसार, सीमा पार करने के बाद अवैध घुसपैठिये संगठित गिरोहों की मदद से महानगरों और औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं। इन गिरोहों का पूरा जाल सक्रिय रहता है, जो उन्हें रहने की जगह, नकली पहचान पत्र, रोजगार और एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाने की व्यवस्था करता है। नकली आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क भी जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं। मोदी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल घुसपैठियों को चिन्हित करना ही लक्ष्य नहीं होगा, बल्कि उन्हें संरक्षण देने वाले पूरे तंत्र को जड़ से खत्म किया जाएगा।

इस अभियान में प्रवर्तन निदेशालय को विशेष जिम्मेदारी दी जा सकती है। एजेंसी उन आर्थिक नेटवर्कों की जांच करेगी जिनके जरिये अवैध घुसपैठ का कारोबार फलफूल रहा है। घुसपैठ से जुड़े धन के स्रोतों की पहचान कर उनकी संपत्तियां जब्त करने की तैयारी है। वहीं खुफिया एजेंसियां राज्यों की पुलिस और प्रशासन को ठोस और त्वरित सूचनाएं उपलब्ध कराएंगी ताकि कार्रवाई तेज और प्रभावी ढंग से हो सके।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह लंबे समय से इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते रहे हैं। पिछले वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले की प्राचीर से अवैध घुसपैठ और सीमावर्ती क्षेत्रों में हो रहे जनसंख्या बदलाव को गंभीर राष्ट्रीय चुनौती बताया था। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि देश की सुरक्षा और सामाजिक संतुलन के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उसी संकल्प को अब जमीन पर उतारने की दिशा में तेजी दिखाई दे रही है।

साथ ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल के महीनों में राजस्थान, गुजरात और त्रिपुरा के सीमावर्ती इलाकों का दौरा कर सीमा प्रबंधन और जनसंख्या बदलाव की स्थिति की समीक्षा की थी। इन दौरों के बाद केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव नवलेकर की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन भी किया। यह समिति सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ साथ महानगरों और औद्योगिक नगरों का अध्ययन कर एक वर्ष के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी। समिति का उद्देश्य उन क्षेत्रों में हो रहे जनसंख्या बदलाव, सुरक्षा चुनौतियों और प्रशासनिक कमियों का गहराई से विश्लेषण करना है।

स्पष्ट है कि मोदी और अमित शाह की जोड़ी अब इस मुद्दे पर किसी प्रकार की ढिलाई के मूड में नहीं है। लंबे समय तक वोट बैंक की राजनीति के कारण अवैध घुसपैठ को नजरअंदाज किया गया, जिसके परिणामस्वरूप कई राज्यों में सामाजिक तनाव, अपराध और जनसंख्या असंतुलन की समस्याएं बढ़ीं। लेकिन अब केंद्र सरकार ने यह संदेश दे दिया है कि भारत की सीमाएं केवल नक्शे की रेखाएं नहीं, बल्कि राष्ट्र की अस्मिता और सुरक्षा का प्रश्न हैं।

माना जा रहा है कि देशभर में एक साथ चलने वाला यह अभियान आने वाले समय में निर्णायक साबित हो सकता है। यदि केंद्र और राज्य एजेंसियां पूरी समन्वित शक्ति के साथ आगे बढ़ती हैं तो घुसपैठियों के नेटवर्क, फर्जी दस्तावेज माफिया और अवैध संरक्षण तंत्र पर गहरी चोट पहुंचेगी। यह केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा, संस्कृति और भविष्य की रक्षा का अभियान है।

मोदी सरकार का यह कठोर रुख उन करोड़ों भारतीयों की भावना को भी मजबूत करता है जो चाहते हैं कि देश में रहने का अधिकार केवल उन्हीं को मिले जो भारत के कानून और संविधान का सम्मान करते हों। अवैध घुसपैठ के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का समय अब आ चुका है और अमित शाह की अगुवाई में केंद्र सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि राष्ट्रहित से ऊपर अब कुछ भी नहीं होगा। हम आपको यह भी याद दिला दें कि हाल ही में अमित शाह ने घुसपैठियों को चेतावनी देते हुए कहा था कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है और एक एक घुसपैठिये को चुन चुन कर बाहर निकाला जायेगा।

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