Vanakkam Poorvottar: Delimitation से लेकर Cauvery तक... दक्षिण की बड़ी चिंताओं पर Amit Shah की बैठक में निकला समाधान का रास्ता!

By नीरज कुमार दुबे | Aug 20, 2026

ऐसे समय में, जबकि दक्षिणी राज्यों के मन में लोकसभा सीटों के परिसीमन को लेकर तमाम तरह की आशंकाएं उठ रही हैं और अंतरराज्यीय जल बंटवारे को लेकर भी विवाद लगातार उभर रहे हैं, तब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में सभी पक्षों को एक मंच पर लाकर संवाद का रास्ता खोल दिया। देखा जाये तो चेन्नई के निकट मामल्लापुरम में हुई परिषद की 31वीं बैठक केवल औपचारिक सरकारी बैठक नहीं रही, बल्कि इसमें दक्षिण भारत की राजनीतिक आवाज, आर्थिक अधिकार, जल विवाद, बुनियादी ढांचे और साझा विकास की बड़ी तस्वीर एक साथ उभरकर सामने आई।

इसे भी पढ़ें: Amit Shah के सामने साउथ के CM ने की 2 बड़ी मांग, बैग देते समय थलापति विजय ने किया क्या इशारा?

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने दक्षिणी राज्यों की आर्थिक चिंता को और व्यापक स्वर दिया। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्य देश की आर्थिक वृद्धि के प्रमुख इंजनों में रहे हैं और आगामी वित्त आयोग के सामने राजस्व बंटवारे की ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें जरूरत के साथ-साथ प्रदर्शन को भी महत्व मिले। विकास, वित्तीय अनुशासन और जनसांख्यिकीय बदलाव में निवेश करने वाले राज्यों को उनकी सफलता के लिए नुकसान में नहीं डाला जाना चाहिए। उन्होंने जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों के सीमित कराधान अधिकारों का मुद्दा भी उठाया और कर दरों के निर्धारण में राज्यों को अधिक लचीलापन देने की जरूरत बताई।

जल विवादों ने भी बैठक को खासा अहम बना दिया। कावेरी और मेकेदातु विवाद के बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के बीच बातचीत हुई। शिवकुमार ने मेकेदातु परियोजना को तमिलनाडु और पुडुचेरी के किसानों के लिए भी फायदेमंद बताते हुए सहयोग की अपील की। वहीं, तमिलनाडु इस परियोजना का लंबे समय से विरोध करता रहा है, क्योंकि उसे आशंका है कि इससे कावेरी के पानी में उसके हिस्से और राज्य के जल हितों पर असर पड़ सकता है।

साथ ही विजय ने साझा नदियों के मामले में दो स्पष्ट सिद्धांत सामने रखे। एक तो निचले तटीय राज्यों के वैध अधिकार और सुनिश्चित जल प्रवाह पर निर्भर लोगों की आजीविका की रक्षा, तथा सुप्रीम कोर्ट के फैसलों, नदी जल न्यायाधिकरणों के आदेशों और वैधानिक प्रबंधन तंत्र का पूरी तरह पालन। उन्होंने कावेरी पर न्यायिक और प्राधिकरण के फैसलों को समयबद्ध तरीके से लागू करने की आवश्यकता बताई। मुल्लापेरियार के मुद्दे पर भी उन्होंने न्यायिक व्यवस्था के दायरे में समाधान की बात रखी।

उधर, केरलम के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने मुल्लापेरियार बांध का सवाल जोरदार ढंग से उठाया। उन्होंने कहा कि केरलम नए बांध के निर्माण के बाद तमिलनाडु को उसके हिस्से का पूरा पानी देने के लिए तैयार है। प्रस्ताव यह है कि डिजाइन, स्थान और निर्माण की जिम्मेदारी तमिलनाडु संभाले, जबकि पूरा खर्च केरलम उठाए। पुराने बांध की सुरक्षा को लेकर दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं। सतीशन ने स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय सुरक्षा के क्षेत्रों में भी सहकारी संघवाद की जरूरत पर बल दिया।

बैठक का सबसे दूरगामी पक्ष दक्षिण भारत को एक साझा आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने का विचार रहा। विजय ने प्रस्ताव रखा कि दक्षिणी राज्य अपनी औद्योगिक और सेवा क्षमताओं को जोड़कर साझा आर्थिक और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित करें। एकीकृत विनिर्माण क्षेत्र, साझा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क और उत्पादन केंद्रों को बंदरगाहों तथा वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाले औद्योगिक कॉरिडोर दक्षिण भारत को विदेशी निवेश के लिए और आकर्षक बना सकते हैं। इससे छोटे शहरों तक उद्योग और रोजगार पहुंचाने का रास्ता भी खुलेगा।

इसी सोच का एक ठोस उदाहरण बेंगलुरु मेट्रो को कर्नाटक के बोम्मसंद्रा से तमिलनाडु के होसुर तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। यह दक्षिण भारत के शुरुआती अंतरराज्यीय मेट्रो संपर्कों में से एक हो सकता है, जो बेंगलुरु के इलेक्ट्रॉनिक सिटी कॉरिडोर को होसुर के तेजी से उभरते औद्योगिक केंद्र से जोड़ेगा। यह केवल मेट्रो लाइन नहीं, बल्कि दो राज्यों की अर्थव्यवस्था, उद्योग और कार्यबल को जोड़ने वाली नई विकास रेखा बन सकती है।

बहरहाल, मामल्लापुरम की इस बैठक ने साफ कर दिया कि दक्षिण भारत के सामने चुनौतियां अलग-अलग जरूर हैं, लेकिन उनका समाधान टकराव में नहीं, संवाद और सहकारी संघवाद में छिपा है। परिसीमन से लेकर वित्तीय अधिकारों तक, कावेरी से मुल्लापेरियार तक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से लेकर साझा औद्योगिक गलियारों तक, अमित शाह की अध्यक्षता वाली इस बैठक ने कम से कम इतना जरूर कर दिया कि लंबे समय से अलग-अलग दिशाओं में चल रहे विवाद अब एक साझा मेज पर रखे गए हैं। अब असली परीक्षा यह होगी कि इस संवाद को फैसलों और फैसलों को जमीन पर उतरने वाली कार्रवाई में कितनी तेजी से बदला जाता है।

प्रमुख खबरें

Adani Enterprises और Jabil Inc ने Data Center उपकरणों के लिए 50:50 साझेदारी का प्रस्ताव दिया

Rishabh Pant चोट के कारण India A के शुरुआती दो Test मैचों से बाहर

Formula 1 की अफ्रीका में 33 साल बाद वापसी, Rwanda में होगा African Grand Prix

FIFA की पारदर्शिता पर सवाल, Gianni Infantino को वर्ल्ड कप संस्था से मिले 1.72 मिलियन डॉलर