चुनाव दर चुनाव महिला मतदाताओं पर ही सबसे ज्यादा भरोसा क्यों जता रही है भाजपा?

By गौतम मोरारका | Nov 07, 2022

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की लोक कल्याणकारी नीतियों में गरीबों को प्रमुखता तो दी ही जाती है साथ ही प्रधानमंत्री का प्रयास महिलाओं को सर्वाधिक राहत और सुविधाएं पहुँचाने का रहता है। चाहे उज्ज्वला योजना की बात हो या प्रधानमंत्री आवास योजना हो या फिर शौचालय निर्माण संबंधी योजना हो अथवा जनधन खाते हों या फिर आयुष्मान योजना, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना अथवा प्रधानमंत्री मुद्रा योजना हो... यह सभी कदम ऐसे रहे जिसने गरीब से गरीब महिला को भी आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त किया है। यही कारण है कि चुनाव दर चुनाव भाजपा को महिलाओं के वोट बढ़ते ही जा रहे हैं। हाल में कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिले मत प्रतिशत में महिलाओं का प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा रहा। उत्तर प्रदेश में तो महिला सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा था और भाजपा की सत्ता में वापसी में महिलाओं के मतों ने बड़ी भूमिका निभाई थी।

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भाजपा ने महिलाओं पर केंद्रित अपने संकल्प पत्र में स्कूटी देने का जो वादा किया है वह काफी हिट साबित हो रहा है। इसी के चलते भाजपा नेता अपनी रैलियों में महिलाओं से अपनी बेटियों को कम से कम 12वीं कक्षा तक पढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह करते हुए कह रहे हैं कि सरकार उन्हें दोपहिया वाहन उपहार में देगी। जिससे वे सुबह स्कूल जाएंगी और शाम को सब्जियां घर लाने में भी आपकी मदद करेंगी। भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में यह भी वादा किया है कि राज्य की सत्ता में वापसी पर हिमाचल प्रदेश में भी समान नागरिक संहिता लागू की जायेगी। 

यही नहीं, हिमाचल में महिलाओं पर कांग्रेस भी काफी ध्यान दे रही है। हिमाचल प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्रों में महिलाओं और धर्म से जुड़े मुद्दे अहम हैं और दोनों दलों में 12 नवंबर को होने वाले महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों के लिए मतदाताओं को अपने पाले में करने की होड़ मची है। कांग्रेस ने ‘‘हर घर लक्ष्मी, नारी सम्मान निधि’’ अभियान शुरू किया है जिसके तहत 300 यूनिट मुफ्त बिजली के अलावा वयस्क महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया गया है।

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दूसरी ओर, हिमाचल प्रदेश में दोनों दलों के घोषणापत्र में धर्म पर भी खासा ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसमें भाजपा ने नयी दिल्ली, जयपुर, चंडीगढ़, मेरठ और मथुरा से 45 विशेष बस शुरू करके प्रमुख मंदिरों और शक्ति पीठों को जोड़ने के लिए ‘‘हिम तीरथ’’ सर्किट का वादा किया है। उधर, कांग्रेस ने पहली बार अपने घोषणापत्र में एक खंड ‘‘देवस्थान और तीर्थ यात्रा’’ को शामिल किया है। इस खंड में कांग्रेस ने सभी बुजुर्गों (एक सहायक के साथ) की पसंद के एक तीर्थस्थल के लिए मुफ्त तीर्थयात्रा के लिए भुगतान करने का वादा किया है। साथ ही राज्य-समर्थित मंदिरों में वार्षिक योगदान को दोगुना करने और मंदिर के पुजारियों को दोगुना वेतन देने का भी वादा किया गया है।

बहरहाल, देखना होगा कि जनता किसके संकल्प को वरीयता देती है। वैसे हिमाचल प्रदेश में एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा का सत्ता में आना लगा रहा है। लेकिन उत्तराखण्ड में चुनावी इतिहास को बदलने वाली भाजपा इस बार हिमाचल प्रदेश में भी इतिहास को बदल देने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है।

-गौतम मोरारका

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